सुक्खू सरकार का बजट हिमाचल को आर्थिक संकट की ओर ले जाने वाला : संदीपनी भारद्वाज

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सुक्खू सरकार का बजट हिमाचल को आर्थिक संकट की ओर ले जाने वाला : संदीपनी भारद्वाज


शिमला, 22 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के वित्त वर्ष 2026–27 के बजट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश में बजट पेश होने के बाद अब विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है। इसी क्रम में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने कांग्रेस की सुक्खू सरकार के बजट को प्रदेश के लिए आर्थिक रूप से चिंताजनक बताया।

संदीपनी भारद्वाज ने रविवार को शिमला में पत्रकार वार्ता में कहा कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार बजट का आकार कम किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले बजट का आकार लगभग 58,514 करोड़ रुपये था, जिसे घटाकर करीब 54,928 करोड़ रुपये कर दिया गया है। उनके अनुसार लगभग 3,500 से 4,000 करोड़ रुपये की कमी से विकास कार्य प्रभावित होंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर हो चुकी है कि सरकार को कर्मचारियों के वेतन का 3 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक हिस्सा अगले छह महीनों के लिए स्थगित करना पड़ा है। उन्होंने इसे वित्तीय संकट का संकेत बताते हुए कहा कि प्रदेश वित्तीय आपातकाल जैसे हालात से गुजर रहा है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में कांग्रेस सरकार ने करीब 45,000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है और प्रदेश पर कुल कर्ज एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। उन्होंने कहा कि लगभग 15,000 करोड़ रुपये की अदायगी का बोझ है, लेकिन इसे चुकाने के लिए सरकार के पास कोई स्पष्ट योजना नजर नहीं आती। उन्होंने सवाल उठाया कि बजट में कर्ज और ब्याज की अदायगी को लेकर कोई ठोस रोडमैप क्यों नहीं दिया गया है।

संदीपनी भारद्वाज ने सरकार पर जनता को भ्रमित करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि पहले बोर्ड और निगमों के चेयरमैन का मानदेय 30 हजार रुपये से बढ़ाकर 80 हजार रुपये किया गया और अब उसमें कटौती का दिखावा किया जा रहा है। उनके अनुसार यह केवल दिखावटी कदम है।

उन्होंने पंचायतों से जुड़े मुद्दे को भी उठाया और कहा कि 15वें वित्त आयोग के तहत पंचायतों और जिला परिषदों को दिए गए धन को वापस लेने की प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। उनका कहना था कि यदि कहीं धन खर्च नहीं हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी अधिकारियों की होनी चाहिए, न कि चुने हुए प्रतिनिधियों की।

किसानों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार दूध के दाम बढ़ाने की बात तो कर रही है, लेकिन दूसरी ओर मिल्क फेडरेशन द्वारा खरीद पर सीमाएं लगाई जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है और करीब 120 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अभी भी लंबित है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की बात करती है, लेकिन किसानों को वास्तविक राहत देने में सफल नहीं हुई है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि बागवानी क्षेत्र की भी अनदेखी की गई है, जबकि हिमाचल प्रदेश एक बागवानी आधारित राज्य है।

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत मिले लगभग 3,300 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट भी सही तरीके से लागू नहीं हो पाए हैं और धन वापसी की स्थिति बन रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि केंद्र से आर्थिक सहायता न मिले तो प्रदेश सरकार के लिए कर्मचारियों को वेतन देना भी मुश्किल हो सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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