हिमाचल में सेब के कम उत्पादन से बागवानों को मिल रहे बेहतर दाम, बगीचों में ही हो रहे लाखों के सौदे
शिमला, 08 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में इस साल सेब सीजन की तस्वीर पिछले वर्षों से अलग नजर आ रही है। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण सेब उत्पादन में बड़ी गिरावट का अनुमान है। दूसरी ओर कम फसल की वजह से बाजार में मांग बढ़ गई है और बागवानों को उम्मीद से बेहतर दाम मिलने लगे हैं। कई इलाकों में कारोबारी सीधे बगीचों में पहुंचकर पेड़ों पर लगी फसल के सौदे कर रहे हैं। इससे किसानों को अच्छी कीमत मिलने के साथ मंडियों तक सेब पहुंचाने का खर्च और मेहनत भी बच रही है।
बागवानी विभाग के ताजा आकलन के अनुसार वर्ष 2026-27 में प्रदेश में 2 करोड़ 18 लाख 35 हजार 350 पेटियां सेब उत्पादन होने का अनुमान है। पिछले वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 3 करोड़ 49 लाख 93 हजार 800 पेटियां सेब पैदा हुआ था। इस बार पिछले साल की तुलना में करीब 1 करोड़ 31 लाख 58 हजार 450 पेटियां कम उत्पादन रहने की संभावना है। विभाग का मानना है कि पर्याप्त ठंड और बर्फबारी नहीं होने, मौसम में लगातार बदलाव और जलवायु परिवर्तन का असर इस गिरावट की प्रमुख वजह है।
कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में टाईडमैन वैरायटी का सेब बाजार में आना शुरू हो गया है। इसके साथ ही व्यापारी मंडियों का इंतजार करने के बजाय सीधे बगीचों में पहुंच रहे हैं। कई स्थानों पर 20 किलो की एक पेटी के 2,000 से 2,200 रुपये तक के भाव मिल रहे हैं। व्यापारी मौके पर ही पूरी फसल का आकलन कर लाखों रुपये के सौदे कर रहे हैं। इसके बाद तुड़ान, ग्रेडिंग, पैकिंग और मंडियों तक सेब पहुंचाने की जिम्मेदारी भी वही संभाल रहे हैं। इससे बागवानों का खर्च कम हो रहा है और उन्हें फसल बेचने की प्रक्रिया भी आसान लग रही है।
मंडी जिले के करसोग क्षेत्र सहित कई इलाकों में इस तरह के सौदे तेजी से बढ़ रहे हैं। हालांकि कम उत्पादन के कारण पेड़ों पर लगी फसल का सही अनुमान लगाना कारोबारियों के लिए आसान नहीं है। इसके बाद भी बाजार में मांग अधिक होने के कारण व्यापारी जोखिम उठाकर सीधे किसानों से खरीद कर रहे हैं।
माहूंनाग क्षेत्र के बागवान छयाल सिंह चौहान का कहना है कि इस बार मौसम का असर उत्पादन पर साफ दिखाई दे रहा है। उनके बगीचे में टाईडमैन वैरायटी का पहला तोड़ान व्यापारी ने घर पहुंचकर 2,000 रुपये प्रति पेटी की दर से खरीद लिया। इससे उन्हें मंडी तक सेब ले जाने की जरूरत नहीं पड़ी और अतिरिक्त खर्च भी बच गया। उनका कहना है कि फसल कम है, फिर भी अच्छे दाम मिलने से नुकसान कुछ हद तक कम हो रहा है। वहीं सेब कारोबारी कांशीराम का कहना है कि उत्पादन कम होने से बगीचों में लगी फसल का अनुमान लगाना कठिन हो गया है। इसके बाद भी बाजार में मांग को देखते हुए व्यापारी सीधे बागवानों से खरीद कर रहे हैं।
जिला स्तर पर इस बार भी शिमला सबसे बड़ा सेब उत्पादक रहने की उम्मीद है। यहां 1 करोड़ 15 लाख 49 हजार 500 पेटियां उत्पादन का अनुमान है। कुल्लू में 37 लाख 60 हजार 500, किन्नौर में 28 लाख 18 हजार, मंडी में 22 लाख 83 हजार 300, चंबा में 10 लाख 16 हजार 900, सिरमौर में 2 लाख 67 हजार और लाहौल-स्पीति में 1 लाख 9 हजार 200 पेटियां उत्पादन होने का अनुमान लगाया गया है।
पिछले एक दशक के आंकड़े भी दिखाते हैं कि प्रदेश में सेब उत्पादन पूरी तरह मौसम पर निर्भर रहा है। अनुकूल मौसम वाले वर्षों में अच्छी पैदावार हुई, जबकि ओलावृष्टि, अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और रोगों के कारण कई बार उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई। वर्ष 2025-26 में 3.49 करोड़, 2024-25 में 2.51 करोड़, 2023-24 में 2.11 करोड़, 2022-23 में 3.36 करोड़, 2021-22 में 3.05 करोड़, 2020-21 में 2.40 करोड़, 2019-20 में 3.57 करोड़ और 2015-16 में रिकॉर्ड 3.88 करोड़ पेटियां सेब उत्पादन हुआ था। इस साल उत्पादन फिर घटकर 2.18 करोड़ पेटियों तक रहने का अनुमान है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

