हिम बस कार्ड को लेकर महिलाओं का विरोध, घेरा एचआरटीसी दफ्तर उठाए सवाल
शिमला, 07 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के लिए बसों में 50 प्रतिशत रियायती सफर के लिए हिम बस कार्ड अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ विरोध शुरू हो गया है। इस मुद्दे को लेकर जनवादी महिला समिति की कार्यकर्ताओं ने शनिवार को शिमला में हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के प्रबंध निदेशक कार्यालय का घेराव किया और सरकार के इस फैसले को वापस लेने की मांग उठाई। प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना था कि सरकार ने 31 जनवरी तक हिम बस कार्ड बनवाना अनिवार्य किया है और इसके बाद बिना कार्ड के महिलाओं से बसों में पूरा किराया लिया जाएगा।
जनवादी महिला समिति की राज्य सचिव फालमा चौहान ने कहा कि सरकार को इस मामले में अन्य राज्यों से सीख लेने की जरूरत है। उनका कहना था कि पंजाब सहित कई राज्यों में महिलाएं केवल आधार कार्ड दिखाकर बसों में रियायती सफर कर सकती हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश में इसके लिए अलग से हिम बस कार्ड बनवाना अनिवार्य किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार लगातार एचआरटीसी के निजीकरण की दिशा में कदम बढ़ा रही है और इस तरह के फैसले आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं रोजमर्रा के कामों के लिए मुख्य रूप से बस सेवा पर ही निर्भर रहती हैं, क्योंकि वहां परिवहन के अन्य साधन उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में अलग से कार्ड बनवाने की अनिवार्यता से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
फालमा चौहान ने यह भी कहा कि हाल ही में सरकार ने स्कूली बच्चों के बस पास के किराए में भी बढ़ोतरी की है, जिससे परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार महिलाओं और स्कूली बच्चों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालकर एचआरटीसी को घाटे से बाहर निकालना चाहती है। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने मांग की कि सरकार हिम बस कार्ड को अनिवार्य बनाने का फैसला वापस ले और पहले की तरह महिलाओं को बिना किसी अतिरिक्त शर्त के बसों में 50 प्रतिशत रियायती सफर की सुविधा जारी रखी जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

