शिमला में हिम एमएसएमई फेस्ट शुरू, सीएम सुक्खू ने बताया छोटे उद्योगों के लिए बड़ा अवसर

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शिमला में हिम एमएसएमई फेस्ट शुरू, सीएम सुक्खू ने बताया छोटे उद्योगों के लिए बड़ा अवसर


शिमला, 03 जनवरी (हि.स.)। शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर शनिवार को हिम एमएसएमई फेस्ट 2026 की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस फेस्ट का शुभारंभ करते हुए कहा कि यह आयोजन हिमाचल प्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को नई दिशा देने वाला साबित होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार छोटे उद्योगों, कारीगरों और नए उद्यमियों को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है और यह फेस्ट उसी सोच का हिस्सा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिम एमएसएमई फेस्ट केवल एक प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि प्रदेश के हजारों छोटे उद्यमियों, कारीगरों और स्टार्ट-अप्स के लिए आगे बढ़ने का मंच है। इस आयोजन के जरिए ‘मेड इन हिमाचल’ को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण, पारंपरिक और स्थानीय उत्पादों को देश और विदेश में पहचान मिल सके। उन्होंने बताया कि हिमाचली उत्पादों को एक अलग पहचान देने के लिए सरकार ‘हिम’ ब्रांड नाम को प्रमोट कर रही है, जिससे प्रदेश में बने उत्पाद देशभर में लोकप्रिय हो सकें।

ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि एमएसएमई प्रदर्शन संवर्धन और तीव्रता कार्यक्रम के माध्यम से उद्यमियों को क्षमता बढ़ाने, वित्तीय सहायता और बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी। इससे हिमाचल के छोटे उद्योग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनेंगे। उन्होंने दोहराया कि मौजूदा सरकार का लक्ष्य हिमाचल प्रदेश को देश का सबसे समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाना है और हिम एमएसएमई फेस्ट इस लक्ष्य को मजबूती देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस फेस्ट के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ा जाएगा और निवेशकों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि फेस्ट में एमएसएमई के हरितीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे प्रदूषण कम होगा, ऊर्जा का बेहतर उपयोग होगा और परिपत्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल हिमाचल को हरित ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

उन्होंने कहा कि फेस्ट के दौरान देश और विदेश की कई प्रतिष्ठित कंपनियों के प्रतिनिधि हिमाचल पहुंच रहे हैं। इससे कारीगरों, बुनकरों और छोटे उद्यमियों को अपने उत्पाद सीधे वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का मौका मिलेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के कारीगरों द्वारा हाथ से बनाई गई शॉल के प्रदर्शन को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला है, जो हिमाचल के लिए गर्व की बात है और इससे हिमाचली उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिम एमएसएमई फेस्ट नवाचार, निवेश और नए विचारों का संगम है। इससे प्रदेश में स्टार्ट-अप और उद्यम संस्कृति को नई ऊर्जा मिलेगी। आयोजन के दौरान महिला उद्यमिता और ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना पर विशेष फोकस किया जा रहा है। महिला उद्यमियों के लिए अलग सत्र रखे गए हैं, जहां उन्हें नेटवर्किंग और अनुभव साझा करने के अवसर मिलेंगे।

उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में प्रदेश सरकार ने दुबई, जापान और मुंबई जैसे बड़े औद्योगिक केंद्रों में निवेशकों के साथ बैठकें की हैं। इसके चलते पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश समझौतों पर सहमति बनी है। इसके अलावा 14 हजार करोड़ रुपये की 683 औद्योगिक परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनसे करीब 32 हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में एमएसएमई को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार को 1,642 करोड़ रुपये के प्रस्ताव भेजे गए हैं, जिनमें से अब तक 109 करोड़ 34 लाख रुपये स्वीकृत हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि बीते तीन वर्षों में प्रदेश में 107 स्टार्ट-अप शुरू हो चुके हैं, जबकि 407 स्टार्ट-अप स्थापना की प्रक्रिया में हैं।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने फेस्ट में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह आयोजन हिमाचल के एमएसएमई क्षेत्र को बाजार, निवेश और आधुनिक तकनीक से जोड़कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया और विभिन्न उद्यमियों को सम्मानित भी किया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी में लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया और उत्पादों में गहरी रुचि दिखाई।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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