चिट्टा तस्करी मामले में चार आरोपियों को जमानत से हाईकोर्ट ने किया इनकार
शिमला, 08 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चिट्टा तस्करी के एक बड़े मामले में आरोपी शाही महात्मा, निशांत चौहान, दीपक शर्मा और हितेश ठाकुर की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने कहा है कि इस मामले में बरामद प्रतिबंधित पदार्थ की मात्रा वाणिज्यिक श्रेणी में आती है और ऐसे मामलों में जमानत देना कानून के अनुरूप नहीं है।
न्यायाधीश विरेंदर सिंह ने इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि आरोपी समानता के आधार पर जमानत की मांग कर रहे थे, क्योंकि ट्रायल कोर्ट ने कुछ सह-आरोपियों को जमानत दी है। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने जिन मामलों में सह-आरोपियों को जमानत दी, उनमें एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 (1)(b)(ii) के सख्त प्रावधानों पर सही ढंग से विचार नहीं किया गया।
आरोपियों की ओर से दलील दी गई थी कि उनके पास से कोई चिट्टा या अन्य प्रतिबंधित पदार्थ बरामद नहीं हुआ है। यह भी कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने आरोप तय करने के समय उन्हें एनडीपीएस एक्ट की धारा 27ए और भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 के तहत आरोपों से मुक्त कर दिया है। आरोपियों का कहना था कि उन्हें केवल खुलासे के बयान, कथित इकबालिया बयान और वित्तीय लेनदेन के आधार पर इस मामले में फंसाया गया है।
वहीं अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि जांच के दौरान आरोपी मुद्दसिर अहमद मोची ने खुलासा किया था कि वह चिट्टा और हेरोइन की तस्करी करता है और शाही महात्मा के साथ एक अंतरराज्यीय गिरोह का हिस्सा है। उसने बताया था कि वह प्रदीप रांटा के साथ मिलकर दिल्ली से चिट्टा लाता था और उसे शाही महात्मा को देता था। इसके बाद शाही महात्मा पेडलरों के जरिए रोहड़ू इलाके में चिट्टा सप्लाई करता था। कई बार पेडलर पिंजौर में शाही महात्मा के घर से ही चिट्टा लेकर जाते थे।
अभियोजन के अनुसार मुद्दसिर अहमद मोची के अंडरवियर से एक काले रंग के प्लास्टिक लिफाफे में 468.368 ग्राम चिट्टा या हेरोइन बरामद हुई थी। जांच में यह भी सामने आया कि शाही महात्मा पिछले करीब आठ महीनों से चिट्टा बेचने के धंधे में शामिल था और मोबाइल फोन की लोकेशन के जरिए ग्राहकों से संपर्क करता था।
कोर्ट को यह भी बताया गया कि चिट्टा दिल्ली और करनाल से लाया जाता था, जिसे पिंजौर में एक कमरे में रखा जाता था और वहां से रोहड़ू समेत अन्य इलाकों में सप्लाई की जाती थी। जांच में कई स्थानीय पेडलरों के नाम भी सामने आए हैं, जिन्हें आगे बिक्री के लिए चिट्टा दिया जाता था।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जिस मामले में वाणिज्यिक मात्रा में प्रतिबंधित पदार्थ की बरामदगी हुई है और आरोपियों के उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन सामने आए हैं, ऐसे मामलों में जमानत देना एनडीपीएस कानून की मंशा के खिलाफ होगा। इसी आधार पर चारों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

