लोक कला और लोक संस्कृति से बचपन को जोड़ने की अनूठी पहल

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लोक कला और लोक संस्कृति से बचपन को जोड़ने की अनूठी पहल


मंडी, 21 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल सांस्कृतिक शोध संस्थान एवं रंगमंडल ने अपने रचनात्मक सफर में असंख्य छात्र-छात्राओं को अभिनय और रंगकला का प्रशिक्षण देकर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। इस संस्थान के अनेक प्रशिक्षु सिनेमा, टेलीविजन, रंगमंच तथा विभिन्न डिजिटल माध्यमों में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। रंगकर्मी सीमा शर्मा के अनथक प्रयासों से यह संस्थान अनेक प्रतिभाओं को केवल मंच ही नहीं देता, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, अनुशासन और सृजनात्मक दृष्टि भी प्रदान करता है।

उनहोंने मंडी और विशेष रूप से सतोहल ग्राम को राष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान दिलाई है। उनके निरंतर समर्पण के कारण सतोहल आज एक कला ग्राम के रूप में स्थापित हो चुका है, जहां कला केवल सिखाई ही नहीं जाती, बल्कि जीवन-मूल्यों के रूप में आत्मसात भी की जाती है। बाल रंगमंच और शिक्षा में रंगमंच की अवधारणा को जन-जन तक पहुंचाने में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए रंगकर्मी सीमा शर्मा के निर्देशन में सतोहल नाट्य परिसर में बाल कला उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस उत्सव में आसपास के गांवों के लगभग 70 बच्चे, जिनकी आयु 6 से 15 वर्ष के बीच है। ये सभी बच्चे पूरे उत्साह और उमंग के साथ कार्यशला में भाग ले रहे हैं।

सीमा शर्मा ने बताया कि यह प्रशिक्षण केवल कला सीखने तक सीमित नहीं है। बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास, अनुशासन, संवेदनशीलता, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और रचनात्मक सोच को भी विकसित कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज जब बच्चों का अधिकांश समय मोबाइल और डिजिटल दुनिया में सिमटता जा रहा है। ऐसे समय में यह कार्यशाला उन्हें प्रकृति, समाज, लोकजीवन और अपनी सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने का एक सार्थक माध्यम बन रही है। स्थानीय बच्चों के सर्वांगीण कलात्मक, सांस्कृतिक और मानवीय विकास के उद्देश्य से आयोजित यह बाल कला उत्सव केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने का एक सशक्त सांस्कृतिक अभियान है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

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