चिंतपूर्णी मंदिर ट्रस्ट की गाड़ियों के इस्तेमाल पर हिमाचल हाईकोर्ट सख्त, डीसी ऊना और पुलिस के उपयोग में चल रहे वाहन जब्त करने के आदेश
शिमला, 17 अप्रैल (हि.स.)। माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर ट्रस्ट की संपत्तियों के उपयोग को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने ट्रस्ट के धन से खरीदी गई उस गाड़ी को, जिसका इस्तेमाल उपायुक्त ऊना कर रहे हैं और मंदिर को दान में मिली दूसरी गाड़ी, जिसका उपयोग पुलिस विभाग द्वारा किया जा रहा है, जब्त करने के आदेश जारी किए हैं। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब भी तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह सन्धावालिया और न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.सी. नेगी की खंडपीठ ने यह आदेश अंकुर कालिया द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद दिए। अदालत ने मामले में मुख्य सचिव, प्रधान सचिव (भाषा, कला एवं संस्कृति) और सह मुख्य आयुक्त (मंदिर) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिका में उपायुक्त ऊना तथा एक पूर्व उपायुक्त ऊना और वर्तमान में पंचायती राज विभाग के निदेशक को भी प्रतिवादी बनाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि मंदिर ट्रस्ट की संपत्तियों का उपयोग निर्धारित उद्देश्य से अलग तरीके से किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि मंदिर ट्रस्ट के कोष से खरीदी गई टोयोटा इनोवा क्रिस्टा गाड़ी का उपयोग उपायुक्त ऊना द्वारा किसी भी उद्देश्य के लिए रोका जाए और वाहन को जब्त कर अंतिम आदेशों तक सुरक्षित रखा जाए। साथ ही यह भी मांग की गई है कि मंदिर ट्रस्ट की सभी चल और अचल संपत्तियों के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए जाएं और अदालत की अनुमति के बिना किसी भी संपत्ति को देने, हस्तांतरित करने, बेचने या दान करने पर रोक लगाई जाए।
याचिका में यह भी आग्रह किया गया है कि एक पूर्व उपायुक्त को 30 लाख रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड जमा करने का निर्देश दिया जाए, जिसमें यह आश्वासन हो कि यदि अदालत उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराती है तो वे 2 करोड़ 29 लाख 75 हजार 428 रुपये की राशि ब्याज सहित अपने निजी कोष से जमा करेंगे।
इसके अलावा वर्ष 2022 से 2024 के दौरान मंदिर ट्रस्ट से जुड़े सभी वाहनों, जिनमें मारुति सुजुकी और टाटा सफारी जैसी गाड़ियां शामिल हैं, की मूल लॉगबुक अदालत में पेश करने के निर्देश देने की भी मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने यह भी अनुरोध किया है कि मंदिर ट्रस्ट के स्वामित्व या नियंत्रण में वर्तमान में मौजूद सभी वाहनों की सूची, उनके उपयोग, रखरखाव और संचालन से संबंधित पूरी जानकारी अदालत के सामने रखी जाए, ताकि मंदिर की संपत्तियों के उपयोग में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि मंदिर ट्रस्ट की संपत्तियों का दुरुपयोग हुआ है और अदालत के पूर्व निर्देशों की अवहेलना भी की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित वाहनों को जब्त करने के आदेश जारी करते हुए अधिकारियों से जवाब मांगा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

