हिमाचल के सरकारी स्कूलों से घट रहा बच्चों का नामांकन, 41% स्कूल अब भी इंटरनेट से दूर

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हिमाचल के सरकारी स्कूलों से घट रहा बच्चों का नामांकन, 41% स्कूल अब भी इंटरनेट से दूर


शिमला, 09 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों में बच्चों का नामांकन लगातार घट रहा है और बड़ी संख्या में स्कूल आज भी बुनियादी डिजिटल सुविधाओं से वंचित हैं। राज्य विधानसभा में पेश वित्त वर्ष 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट से सामने आया है कि पिछले तीन वर्षों में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का प्रतिशत करीब 6 प्रतिशत कम हो गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2021-22 में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का हिस्सा 62.7 प्रतिशत था, जो वर्ष 2024-25 में घटकर 56.3 प्रतिशत रह गया। इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर प्री-प्राइमरी और प्राथमिक स्तर पर देखने को मिला है। सरकारी स्कूलों में सुविधाओं की कमी और निजी स्कूलों की ओर बढ़ती अभिभावकों की रुचि इसकी प्रमुख वजह मानी जा रही है।

आंकड़ों के अनुसार प्री-प्राइमरी स्तर पर सरकारी स्कूलों में नामांकन 40.7 प्रतिशत से घटकर 37.4 प्रतिशत रह गया है। वहीं कक्षा 1 से 5 तक प्राथमिक स्तर पर यह 56.7 प्रतिशत से गिरकर 50.5 प्रतिशत हो गया। कक्षा 6 से 8 तक उच्च प्राथमिक स्तर पर नामांकन 64.2 प्रतिशत से घटकर 60 प्रतिशत रह गया है। इसी तरह कक्षा 1 से 8 तक कुल प्रारंभिक स्तर पर नामांकन 59.5 प्रतिशत से घटकर 54.4 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

माध्यमिक स्तर यानी कक्षा 9 और 10 में भी नामांकन 67 प्रतिशत से घटकर 65.2 प्रतिशत रह गया है। हालांकि उच्च माध्यमिक स्तर यानी कक्षा 11 और 12 में सरकारी स्कूलों की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है, लेकिन यहां भी गिरावट दर्ज की गई है और नामांकन 81.5 प्रतिशत से घटकर 73.1 प्रतिशत रह गया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकारी स्कूलों में नामांकन घटने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें सरकारी शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता को लेकर अभिभावकों की धारणा, जनसंख्या में बदलाव और ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर बढ़ता प्रवासन शामिल है। इन कारणों से निजी स्कूलों की ओर झुकाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

डिजिटल सुविधाओं की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। प्रदेश के केवल 59 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में ही इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है, जबकि 41 प्रतिशत स्कूल आज भी इंटरनेट से पूरी तरह वंचित हैं। हालांकि 75 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर उपलब्ध हैं, लेकिन इंटरनेट की कमी डिजिटल शिक्षा की राह में बड़ी बाधा बन रही है।

विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की सुविधाओं को लेकर भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 5926 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान की गई है, लेकिन केवल 27.7 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में ही उनके लिए अलग शौचालय की व्यवस्था है। इससे समावेशी शिक्षा के लक्ष्य को पूरा करने में चुनौतियां सामने आ रही हैं।

उच्च शिक्षा संस्थानों में भी डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता समान नहीं है। राज्य के केवल 50 सरकारी महाविद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा है, जबकि 17 महाविद्यालयों में आईसीटी प्रयोगशालाएं और केवल 14 महाविद्यालयों में वर्चुअल कक्षाओं की सुविधा उपलब्ध है।

हालांकि रिपोर्ट में एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया है। सरकारी शिक्षण संस्थानों में व्यावसायिक शिक्षा से जुड़े पाठ्यक्रमों में नामांकन बढ़ रहा है। लेकिन उद्योगों से जुड़ी इंटर्नशिप, कौशल प्रयोगशालाओं और प्लेसमेंट की संरचना अभी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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