विश्वविद्यालयों को एआई, डेटा साइंस और नवाचार में आगे आना होगा: राज्यपाल

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विश्वविद्यालयों को एआई, डेटा साइंस और नवाचार में आगे आना होगा: राज्यपाल


शिमला, 14 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा है कि बदलते दौर में विश्वविद्यालयों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा और हरित प्रौद्योगिकी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि शोध, नवाचार और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देकर विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना चाहिए।

राज्यपाल मंगलवार को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय कोर्ट की 36वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय में स्थापित डिजिटल स्टूडियो और मॉक रिकॉर्डिंग स्टूडियो का उद्घाटन भी किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय देश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में शामिल है और इसे शिक्षा की गुणवत्ता तथा अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी पहचान और मजबूत करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में ऐसे पाठ्यक्रम विकसित किए जाने चाहिए जो विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, व्यावहारिक कौशल और नवाचार की समझ भी दें। उनके अनुसार एआई, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा और हरित प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में विश्वविद्यालयों को इन विषयों में अनुसंधान और विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं होना चाहिए। विश्वविद्यालयों को ऐसे विद्यार्थी तैयार करने चाहिए जो समाज और देश के विकास में योगदान दे सकें। उन्होंने रोजगारपरक शिक्षा, स्टार्टअप संस्कृति, इन्क्यूबेशन सेंटर, उद्योगों के साथ साझेदारी और इंटर्नशिप कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की आवश्यकता भी बताई।

उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से डिजिटल शिक्षा को मजबूत करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा, वर्चुअल कक्षाएं, डिजिटल पुस्तकालय, ई-लर्निंग और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी तकनीकों का अधिक उपयोग किया जाना चाहिए। साथ ही पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास से जुड़े विषयों पर भी शोध बढ़ाने की जरूरत है।

बैठक में राज्यपाल ने विश्वविद्यालय कोर्ट की बैठक हर तीन महीने में नियमित रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पुराने ऑडिट पैरा जल्द निपटाने पर भी जोर दिया। साथ ही शिक्षकों से सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के तहत एक-एक गांव गोद लेकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।

बैठक में कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में हरित ऊर्जा एवं नैनो टेक्नोलॉजी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, पहाड़ी संस्कृति एवं धरोहर, आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े नए केंद्र स्थापित किए गए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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