आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा को जोड़ने की जरूरत : राज्यपाल कविंद्र गुप्ता
शिमला, 22 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के कुलाधिपति एवं राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल छात्रों को पेशेवर कौशल देना नहीं है। शिक्षा से छात्रों में चरित्र, नैतिक मूल्य और समाज सेवा की भावना भी विकसित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का समन्वय समय की जरूरत है। इससे आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण को नई दिशा मिलेगी।
राज्यपाल बुधवार को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के 57वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं और वर्ष 1970 में स्थापना के बाद से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और शोध संबंधी उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि एनएएसी का 'ए' ग्रेड विश्वविद्यालय की गुणवत्ता का प्रमाण है। उनके अनुसार स्थापना दिवस उपलब्धियों का आकलन करने और भविष्य की नई दिशा तय करने का अवसर भी है।
राज्यपाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदियां आज बड़ी चुनौती हैं। ऐसे में विश्वविद्यालयों को आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और नई तकनीकों से जुड़े शोध को और मजबूत करना चाहिए। उन्होंने अंतरविषयक शोध, भारतीय ज्ञान परंपरा, क्षेत्रीय भाषाओं, औषधीय पौधों और जैविक खेती जैसे क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों से एक-एक गांव अपनाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि शिक्षक गांवों में शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास से जुड़े कार्यों में सक्रिय योगदान दें।
राज्यपाल ने विद्यार्थम आगच्छ, सेवार्थम निर्गच्छ का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय से निकलने वाले छात्र एक हाथ में आधुनिक तकनीक और दूसरे हाथ में भारतीय संस्कृति और मूल्यों को लेकर आगे बढ़ें। उन्होंने विश्वास जताया कि वैज्ञानिक प्रगति और भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का समन्वय देश को वैश्विक ज्ञान नेतृत्व की दिशा में आगे ले जाएगा।
समारोह के दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के उत्कृष्ट शिक्षक, शोधकर्ता और कर्मचारियों को सम्मानित किया।
इससे पहले कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने राज्यपाल का स्वागत किया और विश्वविद्यालय की हाल की उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय को नवाचार और अनुसंधान के लिए एआरटीआरएसी से शोध अनुदान मिला है। साथ ही रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की 82 लाख और 87 लाख रुपये की दो शोध परियोजनाएं भी स्वीकृत हुई हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने के लिए कई नए अंतरविषयक केंद्र और कौशल आधारित पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

