कसौली के जंगलों में भड़की आग, हेलीकॉप्टर से बरसाया पानी, सेना ने 15 घण्टों बाद पाया काबू
शिमला, 27 मई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में पड़ रही प्रचंड गर्मी के बीच जंगल धधक रहे हैं। सोलन जिला के पर्यटन स्थल कसौली में जंगलों में लगी भीषण आग को काबू में करने के लिए सेना, वायुसेना और स्थानीय प्रशासन को करीब 15 घंटे तक लगातार संघर्ष करना पड़ा। घने जंगलों, पहाड़ी ढलानों और कठिन रास्तों के बीच चले इस बड़े अभियान के बाद आखिरकार गिल्बर्ट ट्रेल और अपर मॉल क्षेत्र में फैली आग पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है। आग बुझाने के लिए जमीन से लेकर आसमान तक एक साथ अभियान चलाया गया। आग की लपटें चंडीगढ़ तक देखी गईं।
दरअसल, 26 मई की दोपहर करीब तीन बजे कसौली के पश्चिमी ढलानों वाले जंगलों में आग भड़क उठी। तेज हवाओं और सूखे जंगलों की वजह से आग तेजी से फैलने लगी। हालात को गंभीर होता देख भारतीय सेना की कसौली ब्रिगेड तुरंत सक्रिय हुई और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। सेना ने स्थानीय प्रशासन, चंडीगढ़ प्रशासन और भारतीय वायुसेना के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई की।
रातभर चले अभियान में सेना के जवान लगातार जंगलों में डटे रहे। दुर्गम इलाकों में पहुंचकर जवानों ने आग को आगे बढ़ने से रोकने के लिए फायरब्रेक तैयार किए और संवेदनशील हिस्सों को अलग करने का काम किया। दूसरी ओर भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने भी मोर्चा संभाला। हेलीकॉप्टरों ने चंडीगढ़ की सुखना झील से पानी भरकर कई बार उड़ान भरी और “बम्बी बकेट” तकनीक के जरिए जंगलों पर पानी गिराया। हवाई और जमीनी स्तर पर चलाए गए संयुक्त अभियान से गिल्बर्ट हिल और अपर मॉल जैसे प्रमुख प्रभावित क्षेत्रों में आग पर नियंत्रण पाया गया।
सेना के अनुसार अभी भी कुछ दुर्गम हिस्सों में छोटे-छोटे हॉटस्पॉट मौजूद हैं, जिन्हें पूरी तरह बुझाने के लिए अभियान जारी है। जवान लगातार निगरानी कर रहे हैं ताकि आग दोबारा न भड़क सके। राहत की बात यह रही कि इस पूरे अभियान के दौरान किसी भी नागरिक, राहतकर्मी या सैन्य कर्मी के घायल होने की सूचना नहीं है। सभी जवान और उपकरण सुरक्षित बताए गए हैं।
इस बीच पश्चिमी कमान के आर्मी कमांडर पुष्पेंद्र सिंह ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर चल रहे अभियान की समीक्षा की और कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे जवानों की सराहना की। उन्होंने आग बुझाने में जुटे सैन्य कर्मियों को मौके पर ही प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित भी किया।
बता दें कि हिमाचल में हर साल गर्मियों के महीने में जंगल आग की जद में आते हैं और कई हेक्टेयर वन्य क्षेत्र राख होता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

