शिमला में 12वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आगाज, 33 देशों की फिल्में होंगी प्रदर्शित

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शिमला में 12वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आगाज, 33 देशों की फिल्में होंगी प्रदर्शित


शिमला, 25 सितंबर (हि.स.)।शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में शुक्रवार को 12वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव शिमला (आईएफएफएस) का आगाज हुआ। तीन दिन चलने वाले इस महोत्सव में भारत के 15 राज्यों और 33 देशों की 96 चयनित लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। ईरान, बुल्गारिया, आर्मेनिया, नेपाल, पुर्तगाल, कनाडा, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया, फ्रांस, रवांडा, युगांडा, इंडोनेशिया, यूक्रेन, स्पेन और ब्राजील सहित कई देशों की फिल्में दर्शकों को देखने को मिलेंगी। महोत्सव में हिंदी, अंग्रेजी, फारसी, पुर्तगाली, कोरियाई, नेपाली, मराठी, तमिल, मलयालम, गुजराती, पंजाबी और बंगाली सहित कई भाषाओं की फिल्में शामिल हैं।

स्वतंत्र फिल्मकारों को मंच, नामी कलाकारों से संवाद का अवसर

महोत्सव का आयोजन एनएफडीसी, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार और भाषा एवं संस्कृति विभाग, हिमाचल प्रदेश के सहयोग से किया जा रहा है। महोत्सव के निदेशक पुष्प राज ठाकुर ने कहा कि इसका उद्देश्य भारत और दुनिया के स्वतंत्र फिल्मकारों को एक मंच उपलब्ध कराना और फिल्मकारों तथा दर्शकों के बीच संवाद के अवसर बढ़ाना है। महोत्सव में लघु फिल्मों के साथ वृत्तचित्र, फीचर और एनीमेशन फिल्में भी दिखाई जाएंगी। उद्घाटन दिवस पर लेखक-निर्देशक अमित राय, अभिनेता मनोज जोशी और अभिनेता शारिब हाशमी सेलिब्रिटी अतिथि के रूप में शामिल हुए और विशेष सत्रों में दर्शकों से संवाद किया। मनोज जोशी ने महोत्सव को नए फिल्मकारों के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया और फिल्म निर्माण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सही इस्तेमाल पर जोर दिया।

सिनेमा अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों को जोड़ने का माध्यम : उपमुख्यमंत्री

उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने उद्घाटन समारोह में कहा कि सिनेमा अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों को जोड़ने का सशक्त माध्यम है। भाषा और संस्कृति अलग हो सकती हैं, लेकिन मानवीय भावनाएं एक जैसी होती हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म महोत्सव केवल फिल्मों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहते, ये अलग-अलग विचारों, संस्कृतियों, भाषाओं और दृष्टिकोणों के बीच संवाद का मंच भी बनते हैं। भारत की विभिन्न भाषाओं और दुनिया के अलग-अलग देशों की फिल्मों का प्रदर्शन सांस्कृतिक विविधता को समझने का अवसर देता है।

मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि शिमला अपनी प्राकृतिक सुंदरता, कला, संस्कृति और साहित्य के कारण देश-दुनिया में अलग पहचान रखता है। अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि हिमाचल की लोक संस्कृति, लोक कथाएं, संगीत, नृत्य, जनजातीय जीवन, हस्तशिल्प और प्राकृतिक परिवेश फिल्मकारों के लिए समृद्ध विषय हैं। उन्होंने युवा फिल्मकारों से अपनी जड़ों और स्थानीय कहानियों से जुड़कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का आह्वान किया। महोत्सव का समापन 27 सितंबर को शाम पांच बजे पुरस्कार समारोह के साथ होगा। राज्यपाल कविंदर गुप्ता समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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