प्रदेश सरकार के सभी किसानों एवं बागवानों के लिए फार्मर आईडी बनवाना अनिवार्य

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शिमला, 03 जनवरी (हि.स.)। कृषि विभाग के एक प्रवक्ता ने यह बताया कि प्रदेश के सभी किसानों एवं बाग़वानों के लिए फार्मर आईडी बनाना अनिवार्य हो गया है। प्रदेश सरकार द्वारा किसानों एवं बाग़वानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी, लक्षित एवं समयबद्ध रूप से उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से भारत सरकार की एग्रीस्टैक पहल के अंतर्गत फार्मर रजिस्ट्री का कार्य किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण परियोजना के तहत प्रदेश के सभी किसानों एवं बाग़वानी की यूनिक फार्मर आईडी तैयार की जा रही है।

उन्होंने कहा कि कृषि एवं बाग़वानी विभाग द्वारा समन्वित रूप से इस कार्य को क्रियान्वित किया जा रहा है। फार्मर आईडी तैयार होने के उपरांत किसान/बाग़वान लाभार्थी के रूप में केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि, बागवानी, प्राकृतिक खेती, बीज, उर्वरक, सिंचाई, फसल बीमा अनुदान, पीएम किसान सम्मान निधि योजना एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे एवं बिना किसी बाधा के प्राप्त कर सकेंगे। फार्मर आईडी बनाने हेतु किसानों/बाग़वानों को आधार आधारित प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूर्ण करनी होगी। यह प्रक्रिया पूर्णतः डिजिटल, सुरक्षित एवं पारदर्शी है। किसान स्वयं भी अपना पंजीकरण कर सकते हैं। इसके लिए वे घर बैठे ऑनलाइन फार्मर आईडी बना सकते हैं।

ऑनलाइन पंजीकरण के लिए किसान गूगल पर Farmer Registry Himachal Pradesh सर्च कर सकते हैं अथवा सीधे वेबसाइट https://hpfr.agristack.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। वेबसाइट पर NIC डैशबोर्ड के माध्यम से Farmer विकल्प पर क्लिक कर पहले अपना यूजर अकाउंट बनाना होगा। इसके पश्चात् किसान अपनी भूमि एवं कृषि से संबंधित विवरण भरकर आवेदन जमा कर सकते हैं। सभी जानकारियों के सफल सत्यापन के उपरांत फार्मर आईडी जारी कर दी जाएगी।

जिन किसानों एवं बाग़वानों को ऑनलाइन प्रक्रिया में किसी प्रकार की असुविधा हो, वे अपने निकटतम लोकमित्र केंद्र में जाकर निःशुल्क फार्मर आईडी बनवा सकते हैं। जहां उन्हें आवश्यक तकनीकी सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके अतिरिक्त्त किसान संबंधित कृषि/बाग़वानी अधिकारी से भी आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने प्रदेश के सभी किसानों एवं बाग़वानों से आग्रह किया कि वे समय रहते अपनी फार्मर आईडी अवश्य बनवाएं, ताकि भविष्य में किसी भी सरकारी योजना, अनुदान अथवा सहायता से वंचित न रहना पड़े।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला

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