लोकतंत्र बचाने के लिए लाखों लोगों ने दिया संघर्ष और बलिदान : बिंदल

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लोकतंत्र बचाने के लिए लाखों लोगों ने दिया संघर्ष और बलिदान : बिंदल


शिमला, 25 जून (हि.स.)। प्रदेश भाजपा ने गुरुवार को शिमला में संविधान हत्या दिवस के अवसर पर वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को याद करते हुए लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिजनों का सम्मान किया। इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की रक्षा के लिए लाखों लोगों ने संघर्ष किया, जेल यात्राएं कीं और बलिदान दिए, जिसके कारण देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को फिर से स्थापित किया जा सका।

कार्यक्रम की शुरुआत शिमला के मॉल रोड स्थित रोटरी टाउन हॉल के बाहर आयोजित एक प्रदर्शनी से हुई। प्रदर्शनी में आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पड़े प्रभाव, प्रेस सेंसरशिप, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियों और लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष से जुड़े दस्तावेजों तथा तस्वीरों को प्रदर्शित किया गया।

प्रदर्शनी का उद्घाटन डॉ. राजीव बिंदल ने किया।

इसके बाद कालीबाड़ी हॉल में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में आपातकाल के दौरान जेल गए लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिजनों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज ने की।

अपने संबोधन में डॉ. बिंदल ने कहा कि 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और विवादित अध्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सत्ता बचाने के लिए पूरे देश में आपातकाल लागू किया, जिसके दौरान विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया गया तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए।

उन्होंने कहा कि 19 महीनों तक चले संघर्ष के बाद देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की पुनर्स्थापना हुई।

डॉ. बिंदल ने आपातकाल के दौरान अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि उस समय वे छात्र जीवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे और भूमिगत रहकर लोकतंत्र के समर्थन में साहित्य छापने तथा लोगों तक पहुंचाने का काम करते थे।

उन्होंने बताया कि बाद में उन्हें गिरफ्तार कर हरियाणा की करनाल जेल भेजा गया, जहां उन्हें शारीरिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उस दौर में अनेक लोगों ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए व्यक्तिगत स्तर पर बड़ी कीमत चुकाई।

उन्होंने यह भी कहा कि आपातकाल के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता प्रभावित हुई और समाचारों के प्रकाशन पर सेंसरशिप लागू की गई। उनके अनुसार, उस समय कई लोगों ने जोखिम उठाकर सूचनाओं को जनता तक पहुंचाने का प्रयास किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना है और उस दौर में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान करना उनके संघर्ष और प्रतिबद्धता के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक माध्यम है।

कार्यक्रम में भाजपा के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, लोकतंत्र सेनानियों, उनके परिजनों और अन्य लोगों ने भाग लिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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