जिंदगी से मुहब्बत है तो सिंथेटिक नशे की जरूरत नहीं : राकेश कंवर

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जिंदगी से मुहब्बत है तो सिंथेटिक नशे की जरूरत नहीं : राकेश कंवर


जिंदगी से मुहब्बत है तो सिंथेटिक नशे की जरूरत नहीं : राकेश कंवर


मंडी, 19 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने युवाओं से नशे से दूर रहकर किताबों और साहित्य से जुड़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि जिंदगी अपने आप में एक नशा है। अगर इसे ढंग से जीने की आदत पड़ जाए तो सिंथेटिक नशे की जरूरत नहीं पड़ेगी। कंवर ने शनिवार को सुंदरनगर स्थित महाराजा लक्ष्मण सेन मेमोरियल कॉलेज के सभागार में ‘नशे को ना, किताबों को हां’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार रेखा वशिष्ठ ने की, जबकि तकनीकी शिक्षा निदेशक रोहित राठौर विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

इस मौके पर शिक्षा सचिव ने उपन्यासकार गंगाराम राजी के नए उपन्यास ‘जीवट’ का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि भाषा का विकास कहानियों के लिए हुआ है और कहानियां इंसान को इतिहास, धर्म, जाति और देश से जोड़ती हैं। उनके अनुसार समाज ने मजहब, जाति, धर्म और देश की सीमाएं बना रखी हैं, लेकिन किताबों की दुनिया इन सीमाओं से बाहर है। किताबों के पात्रों से जुड़कर पाठक उस दुनिया का हिस्सा बन जाता है। उन्होंने युवाओं से विश्व साहित्य पढ़ने और जिंदगी की चुनौतियों का हिम्मत से सामना करने का आह्वान किया। ‘जीवट’ की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह उपन्यास भी हिम्मत के साथ जीवन जीने का संदेश देता है।

उपन्यास पर चर्चा करते हुए साहित्यकार एवं कथाकार मुरारी शर्मा ने कहा कि ‘जीवट’ में मानवीय व्यवहार और संकटों से बाहर निकलने के आत्मबल की कहानी है। उन्होंने कहा कि गंगाराम राजी ने एक मछुआरे की जिंदगी के माध्यम से समुद्र की यात्रा को कथा का आधार बनाया है और इसमें भूगोल, इतिहास, भाषा तथा संस्कारों को साथ रखा है। डा. विजय विशाल ने कहा कि यह उपन्यास केवल कहानी जानने के लिए नहीं, जीवन को समझने के लिए पढ़ा जाना चाहिए। उपन्यासकार गंगाराम राजी ने कहा कि उनकी यह कृति युवाओं को जीवन की चुनौतियों का हिम्मत से सामना करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने ‘नशे को ना, किताबों को हां’ अभियान को विभिन्न शिक्षण संस्थानों तक ले जाने की बात कही।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

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