हिमाचल में महिलाओं का झुकाव स्वरोजगार की ओर, नौकरियों में कम दिलचस्पी
शिमला, 18 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में महिलाओं की आजीविका का सबसे बड़ा आधार स्वरोजगार बनकर उभरा है। राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार प्रदेश की करीब 85 प्रतिशत महिलाएं खेती, पशुपालन, बागवानी, हस्तशिल्प और घर आधारित छोटे व्यवसायों जैसे कार्यों से जुड़ी हुई हैं। इसके मुकाबले नियमित वेतन वाली नौकरियों में महिलाओं की भागीदारी केवल लगभग 12 प्रतिशत है। इससे साफ संकेत मिलता है कि प्रदेश की महिलाएं औपचारिक रोजगार की तुलना में स्व-रोजगार को अधिक प्राथमिकता दे रही हैं।
दिहाड़ी श्रम से जुड़ीं केवल 3% महिलाएं
आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि हिमाचल में महिलाओं की बहुत कम संख्या दिहाड़ी श्रम से जुड़ी है। प्रदेश में केवल लगभग 3 प्रतिशत महिलाएं ही आकस्मिक या दैनिक मजदूरी पर काम कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति एक ओर महिलाओं की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूत भूमिका को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर यह भी बताती है कि स्थायी और संगठित क्षेत्र की नौकरियों तक उनकी पहुंच अभी सीमित है।
महिला श्रमिक भागीदारी दर में हिमाचल राष्ट्रीय औसत से बेहतर
महिलाओं की बड़ी संख्या के स्वरोजगार से जुड़े होने के बावजूद हिमाचल प्रदेश महिला श्रमिक भागीदारी दर के मामले में राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार दिसंबर 2025 तिमाही तक प्रदेश का श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यू.पी.आर.) 50.4 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय औसत करीब 40 प्रतिशत से अधिक है। प्रदेश में लगभग 41.3 प्रतिशत महिलाएं आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं, जो पड़ोसी राज्यों उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा से बेहतर स्थिति को दर्शाता है।
5.18 लाख से अधिक बेरोजगार पंजीकृत, औपचारिक रोजगार बढ़ाने की जरूरत
हालांकि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी मजबूत दिख रही है, लेकिन रोजगार के अवसरों की चुनौती अभी बनी हुई है। दिसंबर 2025 तक प्रदेश के रोजगार कार्यालयों में 5 लाख 18 हजार 807 बेरोजगार युवाओं का पंजीकरण दर्ज किया गया है। कांगड़ा, मंडी, शिमला और चंबा जिलों में पंजीकृत युवाओं की संख्या अधिक है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

