जिला स्तरीय समिति की बैठक में 10 सामुदायिक वन अधिकार दावों को स्वीकृति
मंडी, 16 जनवरी (हि.स.)। उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन की अध्यक्षता में उपायुक्त कार्यालय के वीसी रूम में वन अधिकार कानून 2006 के अंतर्गत जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपमंडल स्तरीय समितियों द्वारा सत्यापित कर मंजूरी के लिए भेजे गए मामलों की समीक्षा की गई। विस्तृत चर्चा के उपरांत समिति ने 10 सामुदायिक वन अधिकार दावों को स्वीकृति प्रदान करते हुए उनका निपटारा किया।
समिति ने तहसील जोगिन्द्रनगर की ग्राम पंचायत सगनेहड़ की फॉरेस्ट राइट कमेटी नागन, तहसील लडभड़ोल की ग्राम पंचायत मतेहड़ की फॉरेस्ट राइट कमेटी काला अंब, ग्राम पंचायत उपरीधार की कफलौन कमेटी, ग्राम पंचायत रोपड़ी की बेला कमेटी तथा ग्राम पंचायत मतेहड़ की जोल, अरला, पनीरू, लाहला और तरिंड कमेटियों द्वारा प्रस्तुत सामुदायिक वन अधिकार दावों पर विचार कर उन्हें स्वीकृति प्रदान की।
बैठक के दौरान उपायुक्त ने सभी उपमंडल अधिकारियों को निर्देश दिए कि वन अधिकार कानून से संबंधित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए उपमंडल स्तरीय समितियों की नियमित बैठकें आयोजित की जाएं, ताकि पात्र लोगों को समय पर उनके अधिकार सुनिश्चित किए जा सकें।
उपायुक्त ने बताया कि वन अधिकार कानून 2006 का उद्देश्य उन लोगों को कानूनी अधिकार प्रदान करना है, जो पीढ़ियों से वनों में निवास करते आए हैं या वनों पर आश्रित रहे हैं, लेकिन जिनके अधिकारों को अब तक औपचारिक मान्यता नहीं मिल पाई थी। इस कानून के अंतर्गत पात्र परिवारों और ग्राम सभाओं को व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकार प्रदान किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है तथा लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि वन क्षेत्रों में निवास करने वाले या वनों पर आश्रित पात्र परिवार एवं ग्राम पंचायतें अपने दावे ग्राम सभा के माध्यम से फॉरेस्ट राइट कमेटी के पास प्रस्तुत कर सकती हैं। इन दावों का सत्यापन ग्राम सभा एवं उपमंडल स्तरीय समिति द्वारा किया जाता है, जिसके उपरांत मामलों को जिला स्तरीय समिति की मंजूरी के लिए भेजा जाता है। इसी प्रक्रिया के अंतर्गत आज यह बैठक आयोजित की गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

