सांसद निधि खर्च न होने पर अधिकारियों पर बरसीं कंगना, 5.5 करोड़ में सिर्फ 50-60 लाख खर्च

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सांसद निधि खर्च न होने पर अधिकारियों पर बरसीं कंगना, 5.5 करोड़ में सिर्फ 50-60 लाख खर्च


सांसद निधि खर्च न होने पर अधिकारियों पर बरसीं कंगना, 5.5 करोड़ में सिर्फ 50-60 लाख खर्च


मंडी, 05 सितंबर (हि.स.)। मंडी की सांसद कंगना रनौत की अध्यक्षता में हुई जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में सांसद निधि खर्च न होने का मुद्दा गरमा गया। कंगना रनौत ने अधिकारियों से सवाल किया कि केंद्र से राशि जारी होने के बाद भी विकास कार्य जमीन पर क्यों नहीं उतर रहे हैं। उन्होंने कहा कि योजनाएं केवल कागजों में नहीं रहनी चाहिएं और पिछली बैठकों में लिए गए फैसलों पर समय पर काम होना चाहिए।

कंगना ने बैठक में कहा कि उन्होंने अपने पूरे संसदीय क्षेत्र के लिए करीब 11 करोड़ रुपये की सांसद निधि जारी की है। मंडी जिले के लिए करीब 5.5 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई, मगर इसमें से केवल 50-60 लाख रुपये ही खर्च हो पाए हैं। सांसद ने अधिकारियों से राशि खर्च नहीं होने का कारण पूछा और कहा कि इस स्थिति के चलते उन्हें वित्त मंत्रालय में जवाब देना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि एक सांसद का काम सांसद निधि के जरिए विकास कार्यों के लिए पैसा उपलब्ध कराना है। इसके बाद संबंधित विभागों की जिम्मेदारी काम को आगे बढ़ाने की है। उन्होंने अधिकारियों से काम में तेजी लाने को कहा।

कंगना ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें लगा कि शायद अधिकारी सोचते हैं, ‘हीरोइन है, हमारा क्या कर लेगी।’ उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश के अधिकारियों की कार्यप्रणाली की आलोचना नहीं करना चाहतीं, क्योंकि इससे देशभर में हिमाचल के अधिकारियों की छवि प्रभावित होगी।

सांसद ने कहा कि करीब दो महीने पहले हुई बैठक में एमपी लैड के कामों को लेकर अधिकारियों ने उन्हें बताया था कि काम हो चुका है। बाद में स्वतंत्र एजेंसी से सर्वे कराया गया तो स्थिति अलग मिली। उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में मंत्रालय को कई पत्र भेजने पड़े और वह तथा उनके निजी सहायक हर दिन मंत्रालय में बैठते रहे।

कंगना ने बैठक में यह भी कहा कि मुझे आपका ऑफिस एक-एक दिन के लिए मिले, तो मैं एक दिन में ये काम करके दिखाऊंगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बैठकों को केवल कागजी औपचारिकता न बनाया जाए। केंद्र से राशि मिलने के बाद भू-अधिग्रहण, जरूरी अनुमतियों और एनओसी के कारण अटके कार्यों की अलग-अलग सूची तैयार की जाए।

उन्होंने निर्देश दिए कि हर लंबित कार्य के लिए समयबद्ध एक्शन प्लान बनाया जाए। इससे यह स्पष्ट होना चाहिए कि कौन सा काम किस स्तर पर अटका है और उसे पूरा करने की जिम्मेदारी किसकी है। कंगना ने कहा कि योजनाओं को कागजों से निकालकर जमीन पर उतारना जरूरी है।

बैठक में बल्ह के विधायक इंद्र सिंह गांधी, द्रंग के विधायक पूर्ण ठाकुर, सरकाघाट के विधायक दलीप ठाकुर, उपायुक्त अपूर्व देवगन, एसपी मंडी विनोद कुमार, नगर निगम की मेयर सुमन ठाकुर और कमिश्नर डॉ. मदन कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

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