हिमाचल में छह महीने बाद हटा डिजास्टर एक्ट, अधिसूचना जारी

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शिमला, 05 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने पिछले करीब छह महीने से राज्य में लागू डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत जारी आदेश को वापस ले लिया है। राजस्व विभाग की आपदा प्रबंधन शाखा की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि 8 अक्तूबर 2025 को जारी किया गया आदेश अब प्रभावी नहीं रहेगा। उस समय सरकार ने मानसूनी वर्षा से हुए भारी नुकसान और प्रदेशभर में बिगड़ी संपर्क व्यवस्था को देखते हुए पंचायत और शहरी निकाय चुनाव टाल दिए थे।

पिछले साल मानसून के दौरान कई जिलों में सड़कें बह गई थीं, जगह-जगह भूस्खलन हुआ था और कई इलाकों का संपर्क टूट गया था। सरकार ने दलील दी थी कि जब तक पूरे प्रदेश में संपर्क व्यवस्था सामान्य नहीं हो जाती, तब तक चुनाव कराना व्यावहारिक नहीं होगा। इसी आधार पर डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 का सहारा लेते हुए चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया था। विपक्षी दल भाजपा और कुछ सामाजिक संगठनों ने इस फैसले पर सवाल उठाए थे और इसे अदालत में चुनौती दी गई थी।

इस मामले में पहले हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सुनवाई की। जनहित याचिका पर फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के पुनर्गठन से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं 28 फरवरी 2026 तक पूरी की जाएं और उसके बाद आठ सप्ताह के भीतर चुनाव कराए जाएं।

राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची, लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया था, जिसमें परिसीमन का हवाला देकर और समय मांगा गया था। अदालत ने साफ कहा था कि परिसीमन का अधूरा काम चुनाव टालने का कोई वैध कारण नहीं है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में देरी स्वीकार नहीं की जा सकती।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने समय सीमा में आंशिक बदलाव करते हुए आरक्षण रोस्टर तैयार करने की अंतिम तारीख 28 फरवरी से बढ़ाकर 31 मार्च 2026 कर दी। अदालत ने निर्देश दिया कि राज्य चुनाव आयोग, पंचायती राज विभाग, शहरी विकास विभाग और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मिलकर 31 मार्च तक सभी लंबित प्रक्रियाएं पूरी करें। इसके बाद चुनाव हर हाल में 31 मई 2026 तक कराए जाएं।

अब सरकार ने डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत 8 अक्तूबर 2025 को जारी आदेश को औपचारिक रूप से वापस ले लिया है। अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि प्रदेश में संपर्क व्यवस्था में काफी सुधार हो चुका है, इसलिए पुराना आदेश जारी रखने का औचित्य नहीं है। इसके साथ ही चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।

बता दें कि हिमाचल प्रदेश में पंचायतों का पांच वर्षीय कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो चुका है, जबकि 50 शहरी निकायों का कार्यकाल 18 जनवरी को खत्म हुआ। प्रदेश में 3577 ग्राम पंचायतें, 90 पंचायत समितियां, 11 जिला परिषद और 71 शहरी स्थानीय निकाय हैं। फिलहाल इन सभी संस्थाओं में प्रशासक नियुक्त हैं और चुने हुए प्रतिनिधि नहीं हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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