बच्चों को चिट्टे से बचाने के लिए घर और स्कूल में खुलकर बातचीत जरूरी: डीजीपी अशोक तिवारी

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बच्चों को चिट्टे से बचाने के लिए घर और स्कूल में खुलकर बातचीत जरूरी: डीजीपी अशोक तिवारी


शिमला, 17 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों से मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से बचाना परिवार, शिक्षण संस्थानों, पुलिस और पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। चिट्टे के खतरे से निपटने के लिए जागरूकता, बच्चों से खुलकर बातचीत और समय रहते शुरुआती संकेतों की पहचान जरूरी है।

डीजीपी शनिवार को शिमला के एक निजी स्कूल के वार्षिक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विद्यार्थियों और अभिभावकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एंटी-चिट्टा जन आंदोलन प्रदेश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने के लिए चलाया जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से इस अभियान का संदेश अपने मित्रों और परिवारों तक पहुंचाने का आग्रह किया।

अशोक तिवारी ने अभिभावकों से बच्चों के साथ पर्याप्त समय बिताने और उनकी चिंताओं को ध्यान से सुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को ऐसा भरोसेमंद माहौल मिलना चाहिए, जिसमें वे बिना झिझक अपनी समस्याएं साझा कर सकें। पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन, साथियों के बीच स्वीकार्यता और सामाजिक अपेक्षाओं का दबाव बच्चों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में माता-पिता का भावनात्मक सहयोग महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि घर बच्चे की पहली पाठशाला है और माता-पिता उसके पहले शिक्षक हैं।

वार्षिक समारोह की थीम ‘ओशन ओडैसी’ का उल्लेख करते हुए डीजीपी ने विद्यार्थियों को जिज्ञासा, साहस और दयालुता के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सफलता केवल शैक्षणिक उपलब्धियों या ऊंचे पदों से नहीं मापी जाती, अच्छे इंसान बनना भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों से नकारात्मक दबाव से बचने और असफलताओं से निराश न होने का आग्रह किया। उन्होंने समारोह में विद्यार्थियों के ड्रिल, बैंड, कराटे और स्केटिंग प्रदर्शनों की सराहना की।

डीजीपी ने कहा कि पुलिस चिट्टा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगी, लेकिन इस अभियान में जनभागीदारी जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान पुलिस ने ईआरएसएस-112 के प्रति जागरूकता शिविर भी लगाया। विद्यार्थियों और अभिभावकों को आपातकालीन हेल्पलाइन, ‘ट्रैक मी’ सुविधा और समय पर सहायता लेने की जानकारी दी गई। इस अवसर पर बताया गया कि आपातकालीन प्रतिक्रिया समय की राष्ट्रीय रैंकिंग में हिमाचल प्रदेश 34वें स्थान से पहले स्थान पर पहुंचा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

Livevns.news Desk
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