सीपीआरआई के 78वें स्थापना दिवस पर किसान और वैज्ञानिक सम्मानित
शिमला, 20 अगस्त (हि.स.)। आलू की खेती और किसानों से जुड़ी नई तकनीकों पर काम करने वाले भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई), शिमला ने गुरुवार को अपना 78वां स्थापना दिवस मनाया। संस्थान के सभागार में आयोजित समारोह में शिमला के सांसद सुरेश कुमार कश्यप मुख्य अतिथि रहे।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, किसानों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।
संस्थान के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया और सीपीआरआई की अनुसंधान यात्रा तथा आलू की बेहतर किस्मों और गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन के क्षेत्र में किए जा रहे काम की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान और नई तकनीकों के जरिए संस्थान आलू की उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने के साथ किसानों तक उन्नत तकनीक पहुंचाने का काम कर रहा है।
सांसद सुरेश कुमार कश्यप ने संस्थान के वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और किसानों को स्थापना दिवस की बधाई दी। उन्होंने कहा कि करीब आठ दशक की यात्रा में सीपीआरआई ने आलू अनुसंधान और उत्पादन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने आधुनिक सीड प्लॉट तकनीक को संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल करते हुए कहा कि स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण बीज आलू उत्पादन की पूरी प्रक्रिया का आधार है।
कश्यप ने वैज्ञानिकों से जलवायु परिवर्तन, पानी की उपलब्धता, उत्पादन लागत, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता जैसे विषयों पर किसान-केंद्रित अनुसंधान को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने वैज्ञानिकों, कृषि विभागों और किसानों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया।
समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों और प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया।
वैज्ञानिक वर्ग में डॉ. दलामु, तकनीकी वर्ग में नीम चंद, प्रशासनिक वर्ग में ओम प्रकाश और कुशल सहायक वर्ग में पदम चंद को प्रमाण-पत्र दिए गए। शिमला क्षेत्र की आशा देवी, रीना देवी, लायक राम, जोगेंद्र और हीरा सिंह को भी सम्मानित किया गया। किसानों को कृषि उपकरण भी वितरित किए गए।
कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने सीपीआरआई को आलू की उन्नत किस्मों और तकनीकों के विकास के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत आलू उत्पादन में दुनिया में दूसरे स्थान पर है और वैज्ञानिक तकनीक व किसानों के बेहतर सहयोग से देश पहले स्थान पर पहुंच सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

