मोदी सरकार की विदेश नीति विफल : कांग्रेस

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शिमला, 06 जनवरी (हि.स.)। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और ठियोग से विधायक कुलदीप राठौर ने अमेरिका की नीतियों और केंद्र की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में अमेरिका का रवैया भारत के प्रति मित्रतापूर्ण नहीं दिखता और ऐसे समय में भारत सरकार की चुप्पी चिंताजनक है। राठौर ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की विदेश नीति पूरी तरह विफल रही है।

कुलदीप राठौर ने मंगलवार को प्रेस वार्ता में कहा कि इस समय दुनिया में अस्थिरता बढ़ रही है। अमेरिका की टैरिफ वॉर की नीति, वेनेजुएला के राष्ट्रपति से जुड़ा घटनाक्रम और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका का दोहरा रवैया इसके संकेत हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भारत के प्रति व्यवहार भी विरोधाभासी रहा है। एक ओर वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हैं, तो दूसरी ओर भारत पर दबाव बनाते हैं, चाहे वह रूस से कच्चा तेल खरीदने का मामला हो या व्यापार से जुड़े फैसले।

राठौर ने कहा कि प्रधानमंत्री देश के सर्वोच्च पद पर हैं, लेकिन उनके खिलाफ की गई टिप्पणियों पर भारत सरकार की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कभी मोदी को “अच्छा इंसान” कहा जाता है और कभी यह कहा जाता है कि उन्हें खुश रखना जरूरी है। ऐसे बयानों से भारत की स्वतंत्र विदेश नीति पर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने भारत-पाक युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि 1971 में अमेरिका के दबाव और धमकियों के बावजूद भारत ने अपने फैसले खुद लिए और पाकिस्तान को दो हिस्सों में बांट दिया। लेकिन आज स्थिति यह है कि अमेरिका रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर पाबंदियों का दबाव बना रहा है।

कुलदीप राठौर ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि न्यूजीलैंड से सेब आयात पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत करना सेब उत्पादक राज्यों के लिए गंभीर खतरा है। अब अमेरिका भी इसी तरह का दबाव बना रहा है, जिससे हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों के किसान और बागवान प्रभावित हो सकते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में भारत के छोटे पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते कमजोर हुए हैं। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहा व्यवहार इसका उदाहरण है। राठौर ने कहा कि मौजूदा सरकार की विदेश नीति न तो देश के हितों की रक्षा कर पा रही है और न ही किसानों-बागवानों के भविष्य को सुरक्षित कर रही है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव में न आए और कोई भी फैसला लेने से पहले हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों के हितों को प्राथमिकता दे। उन्होंने कहा कि किसानों और बागवानों के हितों के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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