तक़सीम और दुरुस्ती मामलों के जल्द निपटारे के लिए सख्त निर्देश, सप्ताह में तीन दिन होगी सुनवाई

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तक़सीम और दुरुस्ती मामलों के जल्द निपटारे के लिए सख्त निर्देश, सप्ताह में तीन दिन होगी सुनवाई


शिमला, 02 जनवरी (हि.स.)। राजस्व मामलों में वर्षों से भटक रहे लोगों को राहत देने की दिशा में हिमाचल प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने लंबित तक़सीम और दुरुस्ती मामलों के शीघ्र समाधान के लिए अधिकारियों को सख्त और स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। शिमला में शुक्रवार को आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 5 जनवरी 2026 के बाद प्रदेश के सभी तहसीलदार और नायब तहसीलदार हर सप्ताह मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को केवल तक़सीम मामलों की सुनवाई करेंगे, ताकि इनका समयबद्ध निपटारा हो सके।

उन्होंने निर्देश दिए कि हर माह तक़सीम मामलों की कम से कम 12 दिन सुनवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिलों के उपायुक्त हर शनिवार को तक़सीम मामलों की सुनवाई की प्रगति की समीक्षा करेंगे और उसी दिन इसकी रिपोर्ट अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) को भेजेंगे। इसके बाद राजस्व सचिव हर सोमवार को यह रिपोर्ट राजस्व मंत्री को सौंपेंगे और राजस्व मंत्री हर माह के अंतिम सोमवार को तक़सीम मामलों के निपटारे की स्थिति से मुख्यमंत्री को अवगत कराएंगे। मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग को प्रदेश में निजी भूमि, वन भूमि और सरकारी भूमि का पूरा विवरण प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए। साथ ही राजस्व अदालतों में लंबित मामलों का विस्तृत ब्योरा, मामलों के प्रकार और उनके लंबित रहने की अवधि की जानकारी भी मांगी गई है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि राजस्व मामलों का त्वरित और समयबद्ध समाधान सरकार की प्राथमिकता है और दुरुस्ती से जुड़े सभी लंबित मामलों को 31 मार्च 2026 तक हर हाल में निपटाया जाए। उन्होंने कहा कि लंबित मामलों के शीघ्र समाधान के लिए जरूरत पड़ने पर सेवानिवृत्त पटवारी, कानूनगो, नायब तहसीलदार और तहसीलदारों को पुनः नियुक्त किया जाएगा। साथ ही संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को समुचित प्रशिक्षण देने के भी निर्देश दिए गए हैं। बैठक में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने भी राजस्व मामलों के समयबद्ध निपटारे के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि राजस्व लोक अदालतों के माध्यम से अक्तूबर 2023 से अब तक प्रदेश में इंतक़ाल के 4 लाख 24 हजार 368, तक़सीम के 25 हजार 918, निशानदेही के 47 हजार 75 और दुरुस्ती के 12 हजार 896 मामलों का निपटारा किया जा चुका है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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