बनखंडी वन्य प्राणी उद्यान का पहला चरण जून 2025 तक होगा पूरा: मुख्यमंत्री

बनखंडी वन्य प्राणी उद्यान का पहला चरण जून 2025 तक होगा पूरा: मुख्यमंत्री
बनखंडी वन्य प्राणी उद्यान का पहला चरण जून 2025 तक होगा पूरा: मुख्यमंत्री


180 हेक्टयेर में फैले उद्यान का निर्माण तीन चरण में होगा

अरण्य वन्य प्राणी उद्यान पर 619 करोड़ खर्च का अनुमान

शिमला, 9 जून (हि.स.)। कांगड़ा के देहरा उप-मंडल के बनखंडी में बनाए जा रहे दुर्गेश अरण्य वन्य प्राणी उद्यान का पहला चरण अगले वर्ष जून तक पूरा कर लिया जाएगा। यह प्राणी उद्यान क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में उभरने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाएगा।

उक्त जानकारी मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रविवार को दी। उन्होंने कहा कि 180 हेक्टयेर में फैले दुर्गेश अरण्य वन्य प्राणी उद्यान पर लगभग 619 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है और इसे तीन वर्ष में तीन चरणों में पूरा करने की योजना है।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि बनखंडी वन्य प्राणी उद्यान के निर्माण के लिए 24 मई, 2024 को केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग के साथ एक समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया है। इसके अतिरिक्त प्राणी उद्यान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हिमुडा बाढ़बंदी कार्य तथा जल संरक्षण गतिविधियों और जल निकासी व्यवस्था जैसे कार्य सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि इस प्राणी उद्यान में वॉक-इन-एवियरी, मोनोरेल सफारी, वॉक-इन-एक्वेरियम, नेचुरल ट्रेल पर्यटकों एवं स्थानीय लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होंगेे। प्रथम चरण में आगन्तुकों के लिए बाघ और शेर के बाड़े तैयार किए जाएंगे। द्वितीय एवं तृतीय चरण के अन्तर्गत भालू और तेन्दुए की सफारी की भी सुविधा दी जाएगी। इसके अतिरिक्त वन विभाग हिम तेन्दुओं के लिए अलग से खंड बनाने की योजना तैयार कर रहा है।

सुक्खू ने कहा कि सैलानियों को आकर्षित करने के लिए प्राणी उद्यान के प्रवेश द्वार पर स्थानीय जीवन शैली को प्रदर्शित करती हुई कांगड़ा गांव की एक प्रतिकृति स्थापित की जाएगी। लोगों की सुविधा के लिए पर्याप्त पार्किंग, इलैक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन और अन्य बुनियादी सुविधाएं मुहैया करवाई जाएगी। प्राणी उद्यान में आने वाले लोगों और जानवरों को गर्मी से निजात दिलाने के लिए वन विभाग को स्थानीय प्रजाति के पेड़-पौधे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्राणी उद्यान जिला कांगड़ा को हिमाचल की पर्यटन राजधानी के रूप में स्थापित करने में मील पत्थर साबित होगा और इससे क्षेत्र में पर्यटकों के आगमन में बढ़ोतरी होगी।

हिन्दुस्थान समाचार/उज्ज्वल

/सुनील

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