राज्य सरकार कर्मचारियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धः मुख्यमंत्री

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शिमला, 10 मई (हि.स.)। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से आज यहां हिमाचल प्रदेश साइंस मास्टर्स एसोसिएशन (एचपीएसएमए) के एक प्रतिनिधिमंडल ने हमीरपुर जिला के अध्यक्ष विकास कौशल के नेतृत्व में शिष्टाचार भेंट की और अपनी मांगों से उन्हें अवगत करवाया। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से टीजीटी शिक्षकों को हेडमास्टर और प्रवक्ता के पदों पर पदोन्नत करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा।

सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार सरकारी कर्मचारियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मंत्रिमंडल की पहली बैठक में सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल की, इसके विपरीत केंद्र सरकार की ओर से यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) लागू करने के लिए निरंतर दबाव डाला जा रहा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार हर परिस्थिति में ओपीएस को बहाल रखेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के ओपीएस लागू करने के निर्णय के परिणामस्वरूप केंद्र सरकार ने 1600 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता बंद कर दी है। इसके अलावा, वर्ष 1952 से राज्य को मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) भी बंद कर दिया गया है, जिससे राज्य को प्रतिवर्ष 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये की वित्तीय नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लोगों को उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार को राजस्व घाटा अनुदान के तहत 54,000 करोड़ रुपये तथा जीएसटी मुआवजे के रूप में 16,000 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, जबकि वर्तमान राज्य सरकार को आरडीजी के रूप में केवल 17,000 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जो चार गुना कम है। इन वित्तीय चुनौतियों के बावजूद राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि प्रदेश का निर्बाध विकास सुनिश्चित हो।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला

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