वकीलों का चक्का जाम उचित नहीं, बातचीत से निकल सकता था समाधान : नरेश चौहान
शिमला, 03 जून (हि.स.)। राजधानी शिमला में एक दिन पहले मंगलवार को हुए वकीलों के प्रदर्शन के बाद शहर की ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होने पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि वकीलों की मांगों पर बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सकता था, लेकिन जिस तरह से प्रदर्शन और चक्का जाम किया गया, उससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि कानून के जानकारों से इस तरह की स्थिति पैदा होने की उम्मीद नहीं थी।
नरेश चौहान ने बुधवार को कहा कि इस प्रदर्शन के कारण राजधानी शिमला में करीब तीन से चार घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। छोटा शिमला सहित कई प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लगा रहा, जिससे दफ्तर जाने वाले लोगों, विद्यार्थियों, मरीजों और पर्यटकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि शिमला पहले से ही ट्रैफिक दबाव से जूझ रहा है और पर्यटन सीजन के दौरान स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ऐसे में किसी भी तरह का चक्का जाम शहर की व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
उन्होंने कहा कि जिन सड़कों पर आवाजाही को लेकर विवाद है, वे प्रतिबंधित श्रेणी में आती हैं और वहां सभी के लिए समान नियम लागू हैं। किसी एक वर्ग को विशेष छूट नहीं दी जा सकती। शिमला की पहचान और मॉल रोड क्षेत्र की व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ मार्गों पर वाहनों की आवाजाही नियंत्रित रखी जाती है। इसी कारण सीमित संख्या में परमिट जारी किए जाते हैं।
नरेश चौहान ने यह भी स्पष्ट किया कि परमिट शुल्क में बढ़ोतरी का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना नहीं, वाहनों की संख्या को नियंत्रित करना है ताकि शहर में ट्रैफिक का दबाव कम किया जा सके।
उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर संवाद के पक्ष में है और मुख्यमंत्री ने स्वयं अधिवक्ताओं के साथ बैठक कर मामले के समाधान के लिए एक समिति गठित करने का फैसला लिया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब बातचीत के सभी रास्ते खुले हुए थे तो शहर की सामान्य व्यवस्था को बाधित करने की जरूरत क्यों पड़ी।
उनका कहना था कि ट्रैफिक नियंत्रण और वाहनों की आवाजाही को संचालित करना पुलिस का काम है। किसी भी संगठन या समूह को लोगों की गाड़ियां रोकने का अधिकार नहीं है।
नरेश चौहान ने कहा कि सरकार की ओर से अधिवक्ताओं को बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन बातचीत के बजाय चक्का जाम का रास्ता अपनाया गया, जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि कानून का पालन सभी को करना चाहिए और कानून को अपने हाथ में लेना सही नहीं है।
उन्होंने बताया कि इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और अब आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

