जलवायु परिवर्तन से बदल रही हिमाचल की खेती, सेब की जगह अनार और जापानी फल अपना रहे किसान

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जलवायु परिवर्तन से बदल रही हिमाचल की खेती, सेब की जगह अनार और जापानी फल अपना रहे किसान


शिमला, 31 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों में जलवायु परिवर्तन का असर अब खेती, पानी के पारंपरिक स्रोतों और ग्रामीण जीवन पर साफ दिखाई देने लगा है। बदलते मौसम और खेती की चुनौतियों के बीच कुल्लू के किसान सेब और अनार के विकल्प तलाशते हुए जापानी फल की खेती अपना रहे हैं। सिरमौर में महिलाएं सूख चुकी बावड़ियों को पुनर्जीवित कर रही हैं, जबकि शिमला के शोघी में ग्रामीणों ने बाढ़ और भूस्खलन से निपटने के लिए अपनी आपदा प्रबंधन समिति बनाई है। हिमाचल की 12 ग्राम पंचायतों में हुए एक अध्ययन से सामने आया है कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे के बीच गांव अपने स्तर पर अनुकूलन के रास्ते तलाश रहे हैं।

काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) ने इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (इसीमोड) के सहयोग से मंडी, कुल्लू, सिरमौर और शिमला जिलों की 12 ग्राम पंचायतों का अध्ययन किया है। इसकी रिपोर्ट शनिवार को शिमला में आयोजित बहु-हितधारक संवाद में जारी की गई।

बदलते मौसम में खेती के नए विकल्प तलाश रहे किसान

अध्ययन के अनुसार जलवायु परिवर्तन का असर किसानों की फसलों और आजीविका पर पड़ रहा है। कुल्लू के बजौरा में अनार के बागों पर वायरस के हमले के बाद किसानों ने जापानी फल (परसिमन) की खेती शुरू की है। शिमला के संधू में 20 से अधिक परिवार प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं। किसानों का अनुभव है कि इससे उन्हें लाभ मिलने के साथ चरम मौसमी परिस्थितियों का सामना करने में भी मदद मिली है। सिरमौर के परारा में किसान सेब की कुछ खास किस्मों के साथ लहसुन उगाकर एकीकृत खेती कर रहे हैं।

तापमान बढ़ने और बर्फबारी के बदलते पैटर्न से सेब के फूल आने, फल की तुड़ाई और गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। इससे बागवानी पर निर्भर परिवारों के सामने आजीविका की चुनौती बढ़ रही है।

35 में से बचीं 10 बावड़ियां, महिलाएं कर रहीं पुनर्जीवित

सिरमौर के थाना कशोगा में कभी 35 बारहमासी बावड़ियां थीं, जिनकी संख्या घटकर 10 रह गई है। प्राकृतिक जलस्रोतों से पानी प्राप्त करने वाले इन पारंपरिक कुंडों को बचाने के लिए महिला समूह आगे आए हैं। पीपल्स साइंस इंस्टीट्यूट और सेंटर फॉर बिजनेस एंड एंटरप्रेन्योरियल डेवलपमेंट से प्रशिक्षण लेने के बाद महिलाएं हर महीने इनकी सफाई करती हैं। उनके प्रयासों से पांच बावड़ियां पुनर्जीवित हो चुकी हैं, जबकि पांच से छह अन्य पर काम जारी है।

आपदा से निपटने के लिए गांवों में तैयारी

शिमला के नजदीक शोघी पंचायत में 2023 की बाढ़ और भूस्खलन के बाद एनजीओ एड्रा इंडिया के सहयोग से ग्राम आपदा प्रबंधन समिति बनाई गई। ग्रामीणों को प्राथमिक उपचार और सुरक्षित निकासी का प्रशिक्षण दिया गया है। अध्ययन में कहा गया है कि अभी बहुत कम गांवों में ऐसी समितियां गठित हुई हैं।

पांच क्षेत्रों में 25 अनुकूलन उपायों की पहचान

सीईईडब्ल्यू की टीम ने स्थानीय भ्रमण और समूह चर्चाओं के माध्यम से ग्रामीणों के अनुभव दर्ज किए। अध्ययन में शामिल सभी 12 पंचायतों ने जलवायु परिवर्तन के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों की जानकारी दी। शोधकर्ताओं ने रणनीतिक दूरदर्शिता (स्ट्रैटेजिक फोरसाइट) पद्धति अपनाई। इसमें वैज्ञानिक प्रमाणों, स्थानीय ज्ञान और विभिन्न हितधारकों के विचारों के आधार पर भविष्य के संभावित खतरों का अनुमान लगाया जाता है। इसके बाद उनसे निपटने के लिए पहले से कदम तय किए जाते हैं।

इस प्रक्रिया में पांच क्षेत्रों में 25 ऐसे अनुकूलन उपाय सामने आए, जिनसे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव गंभीर होने से पहले नुकसान घटाया जा सकता है। जुलाई 2025 में हुए इसी तरह के अभ्यास में 60 से अधिक सामुदायिक प्रतिनिधियों, अधिकारियों और गैर सरकारी संगठनों ने हिस्सा लिया था।

अध्ययन में ग्राम पंचायत स्तर पर आपदा प्रबंधन समितियों को प्रशिक्षण देने और उन्हें जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की सिफारिश की गई है। ग्राम पंचायत क्लाइमेट रेजिलिएंस कैलेंडर जैसे साधनों को भी उपयोगी बताया गया है। जलवायु अनुकूलन के प्रयासों को ग्राम पंचायत विकास योजनाओं से जोड़ने के लिए 30 से अधिक मौजूदा सरकारी नीतियों और योजनाओं का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में फोरसाइट सेल बनाने और जोखिम पहले से तय सीमा पार करते ही धन जारी करने वाली वित्तीय व्यवस्था अपनाने की सिफारिश भी की गई है।

20 हजार करोड़ से अधिक का आपदा नुकसान

रिपोर्ट जारी करते हुए एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक दुनी चंद राणा ने कहा कि अचानक बाढ़, बादल फटने और भारी बारिश से हिमाचल में जनजीवन, बुनियादी ढांचे, बागवानी और पर्यटन प्रभावित हो रहे हैं। विकास योजनाओं में भविष्य के जलवायु जोखिमों का अनुमान लगाकर तैयारी करना जरूरी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

Livevns.news Desk
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