खेती बचाओ, उद्योग बचाओ के नारे के साथ शिमला में जेल भरो आंदोलन, 25 जगहों पर प्रदर्शन
शिमला, 10 अगस्त (हि.स.)। राजधानी शिमला में सोमवार को ‘खेती बचाओ, उद्योग बचाओ’ के नारे के साथ सीटू और हिमाचल किसान सभा के आह्वान पर जेल भरो आंदोलन किया गया। शिमला के अलावा रामपुर, नाहन सहित प्रदेश के जिला और ब्लॉक मुख्यालयों पर करीब 25 जगहों पर रैलियां, धरने और प्रदर्शन हुए। शिमला में सैकड़ों प्रदर्शनकारी गिरफ्तारी देने के लिए रिपोर्टिंग रूम पहुंचे, लेकिन प्रशासन ने किसी को गिरफ्तार नहीं किया।
प्रदर्शन में सीटू, हिमाचल किसान सभा, सेब उत्पादक संघ, पेंशनर एसोसिएशन, एसएफआई, जनवादी महिला समिति, डीवाईएफआई, एआईएलयू, दलित शोषण मुक्ति मंच और शिमला नागरिक सभा सहित कई संगठन शामिल हुए। रामपुर और नाहन में चक्का जाम किया गया। शिमला में आंदोलनकारियों ने जैन धर्मशाला, रिज मैदान और इवनिंग कॉलेज से तीन रैलियां निकालीं। रिपोर्टिंग रूम पहुंचने के बाद ये रैलियां जनसभा में बदल गईं। करीब डेढ़ घंटे तक नारेबाजी और प्रदर्शन हुआ।
आंदोलनकारियों ने चार लेबर कोड, यूरोपीय संघ और इंग्लैंड के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों और भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध किया। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी, तहबाजारी हटाने, नई शिक्षा नीति और आउटसोर्स नीति के मुद्दे उठाए। संसद और विधानसभा में महिला आरक्षण लागू करने तथा पेपर लीक के खिलाफ आंदोलनों में छात्रों और युवाओं पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग भी की गई।
सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, कोषाध्यक्ष जगत राम, सेब उत्पादक संघ के प्रदेशाध्यक्ष सोहन सिंह ठाकुर और हिमाचल किसान सभा नेता संदीप वर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार की किसान और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ निर्णायक संघर्ष की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 10 अगस्त का आंदोलन 26 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले देशव्यापी संघर्ष की तैयारी है। उनके अनुसार इसका नारा ‘खेती बचाओ, उद्योग बचाओ और भारत बचाओ’ होगा।
नेताओं ने दावा किया कि चार लेबर कोड से मजदूरों के अधिकार कमजोर होंगे और मुक्त व्यापार समझौतों से किसानों तथा उद्योगों पर संकट बढ़ सकता है। उन्होंने हिमाचल की सेब और फल अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका जताई।
संगठनों ने चार लेबर कोड रद्द करने, मजदूरों के लिए कम से कम 42 हजार रुपये मासिक मजदूरी, सभी फसलों के लिए सी2+50 प्रतिशत के आधार पर कानूनी एमएसपी और सरकारी खरीद की गारंटी की मांग की। उन्होंने मनरेगा में खेतिहर मजदूरों को 200 दिन काम और 700 रुपये दैनिक मजदूरी, किसानों की कर्ज माफी और आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग भी रखी।
इसके साथ ही बिजली का निजीकरण रोकने, प्री-पेड स्मार्ट मीटर वापस लेने, राज्यों का डिविजिबल पूल में हिस्सा 31 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने और सीड बिल, 2025 लागू नहीं करने की मांग उठाई गई।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

