शिमला में सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ विशेष टीकाकरण अभियान, 1 मार्च से घर-घर सर्वे

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शिमला, 21 फ़रवरी (हि.स.)। महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे सर्वाइकल कैंसर को रोकने के लिए सरकार पहली बार विशेष टीकाकरण अभियान शुरू करने जा रही है। इस अभियान के तहत एक मार्च से आशा वर्कर घर-घर जाकर सर्वे करेंगी और पात्र बालिकाओं की पहचान की जाएगी। यह जानकारी शनिवार को उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दी गई।

बैठक में बताया गया कि यह राष्ट्रव्यापी अभियान 29 मार्च से शुरू करने का प्रस्ताव है और इसके तहत प्रत्येक रविवार को टीकाकरण किया जाएगा। अभियान तीन महीने तक चलेगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र बालिका इस टीकाकरण से वंचित न रहे।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा यानी बच्चेदानी के निचले हिस्से में होने वाला कैंसर है, जो मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) संक्रमण से होता है। यह बीमारी खास तौर पर 30 से 50 वर्ष की महिलाओं में अधिक पाई जाती है और यौन संपर्क से फैलती है। विश्व स्तर पर यह महिलाओं में चौथा सबसे आम कैंसर है, जबकि भारत में यह दूसरा सबसे आम कैंसर माना जाता है। अधिकारियों ने बताया कि एचपीवी टीकाकरण और नियमित जांच से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है। भारत में हर साल करीब 1.2 से 1.3 लाख नए मामले सामने आते हैं और लगभग 75 से 80 हजार महिलाओं में यह कैंसर पाया जाता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार जिन बालिकाओं ने 14 वर्ष की आयु पूरी कर ली है लेकिन 15 वर्ष की नहीं हुई हैं, वे इस टीकाकरण के लिए पात्र होंगी। अभियान के तहत प्रवासी और बेसहारा बालिकाओं को भी शामिल किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि एचपीवी वैक्सीन की एकल खुराक लंबे समय तक मजबूत सुरक्षा देती है और इसे राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थाओं से मंजूरी मिली हुई है। अनुमान है कि इस टीकाकरण से लगभग 83 प्रतिशत तक सर्वाइकल कैंसर के मामलों को रोका जा सकता है।

प्रशासन के मुताबिक निजी क्षेत्र में इस टीके की एक खुराक की कीमत लगभग 10 हजार रुपये तक हो सकती है, लेकिन सरकारी अभियान के तहत यह पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। शिमला शहर में 5 और पूरे जिले में कुल 39 टीकाकरण स्थल चिन्हित किए गए हैं। चयनित रविवार को नजदीकी सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण किया जाएगा। बैठक में बताया गया कि यूएस निर्मित गार्डासिल वैक्सीन की 0.5 एमएल की डोज बाएं बाजू के ऊपरी हिस्से में लगाई जाएगी।

टीकाकरण से पहले पात्र बालिकाओं का पंजीकरण यू-विन पोर्टल पर आशा वर्कर द्वारा किया जाएगा। इसके लिए अभिभावकों की सहमति जरूरी होगी, जो ओटीपी के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि टीकाकरण के बाद हल्का बुखार या इंजेक्शन वाली जगह पर मामूली दर्द जैसे सामान्य और अस्थायी लक्षण हो सकते हैं। बालिकाओं को खाली पेट टीका लगवाने से बचने और टीकाकरण के बाद कम से कम 30 मिनट निगरानी में रहने की सलाह दी गई है।

उपायुक्त अनुपम कश्यप ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि सभी 39 केंद्रों पर पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने श्रम विभाग को भी अभियान से जोड़ने को कहा ताकि प्रवासी मजदूरों के परिवारों तक पहुंच बनाई जा सके। साथ ही शिक्षा विभाग को स्कूलों में व्यापक जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए गए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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