सीएजी ने विभाग को दिए पारदर्शिता बढ़ाने के निर्देश
शिमला, 03 जुलाई (हि.स.)। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) के. संजय मूर्ति ने अपने तीन दिवसीय शिमला प्रवास के दौरान शुक्रवार को प्रधान महालेखाकार (लेखापरीक्षा), हिमाचल प्रदेश के कार्यालय के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने विभाग की पारदर्शिता, जवाबदेही, नवाचार, क्षमता निर्माण तथा लोक सेवा में उत्कृष्टता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उच्च गुणवत्ता वाली साक्ष्य-आधारित लेखापरीक्षा पर विशेष जोर दिया।
समीक्षा बैठक के दौरान 2 जुलाई को वार्षिक लेखापरीक्षा योजना के क्रियान्वयन, डेटा-आधारित लेखापरीक्षाओं की प्रगति तथा तैयार की जा रही लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों की स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। बैठक में लेखापरीक्षा प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और तकनीक आधारित बनाने पर भी चर्चा हुई।
इस अवसर पर प्रधान महालेखाकार (लेखापरीक्षा), हिमाचल प्रदेश पुरुषोत्तम तिवारी ने कार्यालय की कार्यप्रणाली, प्रमुख उपलब्धियों तथा वर्तमान में संचालित महत्वपूर्ण पहलों का प्रस्तुतीकरण किया। उन्होंने डेटा एनालिटिक्स और प्रौद्योगिकी-सक्षम लेखापरीक्षा पद्धतियों के उपयोग, इनसे प्राप्त प्रमुख निष्कर्षों तथा सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन और जवाबदेही को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका की जानकारी भी दी।
सीएजी के. संजय मूर्ति ने अधिकारियों की प्रतिबद्धता और कार्य के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए उन्हें निष्पक्ष, सटीक और साक्ष्य-आधारित लेखापरीक्षा को निरंतर मजबूत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि लेखापरीक्षा का उद्देश्य केवल वित्तीय अनियमितताओं की पहचान करना ही नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने में रचनात्मक योगदान देना भी है।
उन्होंने कार्यपालिका को समयबद्ध, प्रासंगिक और क्रियान्वयन योग्य अनुशंसाएं उपलब्ध कराने के लिए लेखापरीक्षा प्रक्रियाओं को और अधिक व्यवस्थित तथा परिणामोन्मुख बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक तकनीक और डेटा-आधारित लेखापरीक्षा प्रणाली के प्रभावी उपयोग से सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन और सुशासन को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला

