कैबिनेट के फैसले : पंचायत चुनाव में आरक्षण नियम बदलेगी सरकार, 15 जलविद्युत परियोजनाएं रद्द
शिमला, 07 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक शनिवार को मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में शिमला में आयोजित हुई। बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इनमें पंचायत चुनावों के आरक्षण नियमों में प्रस्तावित बदलाव, 15 जलविद्युत परियोजनाओं को रद्द करने, हेलीकॉप्टर टैक्सी सेवाओं को बढ़ाने और विभिन्न विभागों में पद भरने जैसे निर्णय शामिल हैं।
कैबिनेट ने हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (चुनाव) नियम, 1994 के नियम 28, 87, 88 और 89 में संशोधन के प्रस्ताव पर आम जनता से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित करने का निर्णय लिया है। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार वर्ष 2010 को आधार वर्ष मानते हुए जो पंचायतें लगातार दो कार्यकाल तक आरक्षित रही हैं, उन्हें आगामी पंचायत चुनावों में आरक्षित नहीं किया जाएगा।
बैठक में सामाजिक सुरक्षा पेंशन नियम, 2010 में संशोधन को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत ‘निराश्रित’ शब्द की परिभाषा को अधिक स्पष्ट किया गया है और लाभ प्राप्त करने के लिए प्रमाणन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। नए प्रावधान के अनुसार जिन महिलाओं को उनके पति ने छोड़ दिया है, जो उनके साथ नहीं रह रही हैं और जिनके पास आय का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है, उन्हें निराश्रित महिला माना जाएगा और वे पेंशन के लिए पात्र होंगी।
कैबिनेट ने स्वर्ण जयंती ऊर्जा नीति के तहत स्थानीय क्षेत्र विकास निधि का 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य के बच्चों को वित्तीय सहायता देने के लिए उपयोग करने का भी निर्णय लिया। इसके अलावा एक बार की अम्नेस्टी योजना का लाभ लेने के बावजूद समय पर शुरू न हो सकी 15 जलविद्युत परियोजनाओं को रद्द करने का फैसला भी लिया गया।
बैठक में मंडी जिले के पंडोह में 10 मेगावाट की लघु जलविद्युत परियोजना को भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) को सौंपने का निर्णय लिया गया, बशर्ते कि बीबीएमबी परियोजना के लिए ली गई अप्रयुक्त भूमि राज्य सरकार को वापस करेगा। इस परियोजना से राज्य सरकार को 13 प्रतिशत मुफ्त बिजली और 5 प्रतिशत अतिरिक्त बिजली अपने हिस्से के रूप में मिलेगी।
कैबिनेट ने गांवों में पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव के लिए नई नीति को भी मंजूरी दी है। इसके तहत एकल और बहु-ग्राम पेयजल योजनाओं की इन-विलेज अवसंरचना ग्राम पंचायतों को सौंपी जाएगी ताकि स्थानीय स्तर पर इनका बेहतर संचालन हो सके।
दूध उत्पादकों के हित में भी एक अहम फैसला लिया गया। कैबिनेट ने कांगड़ा, हमीरपुर, चंबा और ऊना जिलों के दूध उत्पादकों को शामिल करते हुए धगवार में क्षेत्रीय सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड के गठन को मंजूरी दी है। साथ ही धगवार मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के संचालन और प्रबंधन के लिए नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड को प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया गया।
पर्यटन और हवाई संपर्क को बढ़ावा देने के लिए चंडीगढ़-शिमला-चंडीगढ़ हेलीकॉप्टर टैक्सी सेवा को भी बढ़ाने का फैसला किया गया है। अब यह सेवा सप्ताह में तीन उड़ानों के बजाय 12 उड़ानों तक संचालित होगी और छह दिन तक प्रतिदिन दो उड़ानें चलेंगी। इसके संचालन के लिए राज्य सरकार व्यवहार्यता अंतर अनुदान प्रदान करेगी।
जल शक्ति विभाग में जल जीवन मिशन के तहत कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन फिलहाल राज्य सरकार अपने संसाधनों से जारी करेगी, क्योंकि केंद्र सरकार से इस योजना के तहत अभी तक धनराशि जारी नहीं हुई है।
कैबिनेट ने तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत सरकारी इंजीनियरिंग और फार्मेसी कॉलेजों में 60 जूनियर असिस्टेंट प्रोफेसर के पद भरने को मंजूरी दी है। इसके अलावा सहकारिता विभाग में दो सहायक रजिस्ट्रार और 30 इंस्पेक्टर के पद, शिक्षा विभाग के खेल छात्रावासों में 16 कोच के पद तथा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में तीन जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (आईटी) के पद भरने का निर्णय लिया गया है।
हमीरपुर जिले के खरिड़ी स्थित खेल छात्रावास की क्षमता बढ़ाकर 100 बिस्तर करने और इसे राज्य स्तरीय खेल उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने का फैसला भी कैबिनेट ने लिया है। वहीं ऊना जिले के गगरेट में सब डिविजनल पुलिस कार्यालय खोलने, नूरपुर पुलिस जिले में कोटला पुलिस चौकी को पुलिस थाना बनाने और ऊना जिले के टाहलीवाल फायर पोस्ट को सब फायर स्टेशन में अपग्रेड करने को भी मंजूरी दी गई।
शिमला जिले के कोटखाई और सिरमौर जिले के पांवटा साहिब में नए केंद्रीय विद्यालय खोलने के लिए संबंधित भूमि को शिक्षा मंत्रालय के पक्ष में स्थानांतरित करने का निर्णय भी कैबिनेट ने लिया है।
इसके अलावा 2016 में चयनित रहे सात शेष उम्मीदवारों को लाहौल-स्पीति और कुल्लू जिलों में पटवारी के रिक्त पदों पर नियुक्त करने को मंजूरी दी गई है।
कैबिनेट ने हिमाचल प्रदेश लीज नियम, 2013 में संशोधन करते हुए हिमुडा को भूमि 80 वर्ष की लीज पर देने की अनुमति देने का निर्णय भी लिया है, जबकि पहले यह अवधि अधिकतम 40 वर्ष थी।
बैठक में सिरमौर जिले में शिक्षा विभाग में कार्यरत पार्ट-टाइम वाटर कैरियर, जिन्होंने 31 मार्च 2025 तक 11 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, उनकी सेवाओं को नियमित करने का भी फैसला लिया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

