शिमला में दृष्टिबाधितों का चक्का जाम, कड़ाके की ठंड में किया प्रदर्शन

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शिमला, 05 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में अपनी मांगों को लेकर दृष्टिबाधित जन संगठन का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। कड़ाके की ठंड के बावजूद सोमवार को दृष्टिबाधितों ने सचिवालय के बाहर चक्का जाम कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिससे कार्ट रोड पर कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा। संगठन का कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

दृष्टिबाधित जन संगठन के सदस्य पिछले करीब 70 दिनों से सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। सोमवार सुबह प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए सड़क जाम कर दी। वहीं कालीबाड़ी मंदिर के पास बैठे दिव्यांगों का धरना 804 दिन पूरे कर चुका है। आंदोलनकारियों का कहना है कि ठंड और कठिन हालात के बावजूद वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं।

दृष्टिहीन जन संगठन के सदस्य राजेश ठाकुर ने बताया कि रोजाना पांच दृष्टिबाधित सचिवालय के बाहर धरने पर बैठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1995 से दिव्यांगों के लिए चतुर्थ श्रेणी के बैकलॉग पद अब तक नहीं भरे गए हैं। उनका कहना है कि कोटे के तहत शिक्षा, वन, लोक निर्माण और जल शक्ति विभागों में चतुर्थ श्रेणी के पद भरे जाने चाहिए, लेकिन सरकार इस दिशा में गंभीर नहीं दिख रही है।

राजेश ठाकुर ने बताया कि संगठन की एक प्रमुख मांग दिव्यांग पेंशन को 1700 रुपये से बढ़ाकर 5 हजार रुपये करने की है। उन्होंने कहा कि नया साल शुरू हो गया है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सहारा योजना और बस पास जैसी सुविधाएं भी खत्म कर दी हैं, जिससे दिव्यांगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

दिव्यांग संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी मांगों पर फैसला नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ओक ओवर का घेराव भी किया जा सकता है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी जायज मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका धरना और प्रदर्शन जारी रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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