रसूख पर भारी पड़ी सादगी, बीजेपी दफ्तर में चाय बनाने वाला बन गया जिला परिषद सदस्य

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रसूख पर भारी पड़ी सादगी, बीजेपी दफ्तर में चाय बनाने वाला बन गया जिला परिषद सदस्य


मंडी, 01 जून (हि.स.)। मंडी जिला के सदयाणा वार्ड से निकलकर आई यह खबर केवल एक चुनावी नतीजा मात्र नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र के आंगन में लिखी गई एक बेहद भावुक, प्रेरणादायी और आंखें नम कर देने वाली अनूठी दास्तान है। यह कहानी साबित करती है कि जब निष्ठा की आंखें छलकती हैं, तो राजनीति का बड़े से बड़ा रसूख और रूतबा भी सादगी के आगे पूरी तरह घुटने टेक देता है। कल तक जो परस राम मंडी भाजपा कार्यालय की सीढ़ियों पर खड़े होकर, कड़कड़ाती ठंड और तपती धूप की परवाह किए बिना, हर आने-जाने वाले नेता, पदाधिकारी और आम कार्यकर्ता के हाथों में बेहद अदब और सम्मान के साथ चाय का गर्म कप थमाते थे, आज क्षेत्र की प्रबुद्ध जनता ने उन्हीं कर्मठ हाथों में अपनी तकदीर और पूरे क्षेत्र के विकास की चाबी सौंप दी है।

भाजपा संगठन ने जब जिला परिषद के इस कड़े चुनावी दंगल में अपने इस सबसे अदने, निष्ठावान और वफादार सिपाही पर अटूट विश्वास जताया था, तो उस समय कई बड़े-बड़े राजनीतिक पंडित और विश्लेषक पूरी तरह हैरान रह गए थे, लेकिन परस राम की वर्षों की मूक सेवा, अटूट समर्पण और बहाए गए पसीने ने ऐसा ऐतिहासिक रंग दिखाया कि सदयाणा वार्ड में न सिर्फ गर्व से 'कमल' खिला, बल्कि एक बेहद साधारण कार्यकर्ता का स्वाभिमान भी शान से जीत गया। भाजपा का कार्यालय हो या फिर पार्टी की कोई बड़ी और महत्वपूर्ण रैली, हमेशा अपनी पीठ पर जिम्मेदारी का भारी बोझ उठाए और चेहरे पर एक निश्छल, पवित्र मुस्कान लिए सभी को चाय परोसने वाले परस राम आज खुद राजनीति और सम्मान के मुख्य मंच के केंद्र में विराजमान थे। बरसों से जिन्होंने हमेशा सिर्फ दूसरों को बड़ी-बड़ी कुर्सियों और मंचों पर बैठते देखा था, आज जब जनता के अपार प्यार ने उन्हें जिला परिषद की दहलीज पर ला खड़ा किया, तो परस राम अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए और उनकी आंखें भर आईं। गले में पड़े गेंदे के फूलों के ढेरों हार और गालों पर बहते खुशी के आंसुओं के बीच रुंधे गले से वे सिर्फ इतना ही कह पाए कि लोकतंत्र में सचमुच एक 'चाय वाले' की ईमानदारी और मेहनत का भी बहुत बड़ा मोल होता है। उनकी यह अभूतपूर्व जीत आज पूरे प्रदेश के हर उस छोटे, अंतिम पंक्ति के कार्यकर्ता की जीत बन गई है, जो बिना किसी स्वार्थ के दरी बिछाता है, दीवारों पर पोस्टर लगाता है और झंडे बांधता है।

इस बेहद भावुक, दिलचस्प और कांटे के मुकाबले में जनता ने बड़े-बड़े दावों, धनबल और रसूख को पूरी तरह दरकिनार कर परस राम के पक्ष में एकतरफा प्यार की जोरदार बरसात कर दी। चुनावी नतीजों के आंकड़े भी इस ऐतिहासिक और अकल्पनीय पल की स्पष्ट गवाही दे रहे हैं, जहां परस राम को कुल 7,031 मत प्राप्त हुए, वहीं कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी धर्मेंद्र कुमार को केवल 5,615 मतों पर ही संतोष करना पड़ा। इस तरह परस राम ने अपने मुख्य प्रतिद्वंदी धर्मेंद्र कुमार को 1,416 मतों के एक बहुत बड़े और निर्णायक अंतर से शिकस्त देकर जिला परिषद की सम्मानजनक कुर्सी अपने नाम कर ली। पेशे से बांस के पारंपरिक उत्पाद जैसे कुर्सी, टेबल और पहाड़ी टोकरियां (किल्टे) बनाने का पुश्तैनी काम करने वाले परस राम पार्ट टाइम के रूप में भाजपा कार्यालय में अपनी निस्वार्थ सेवा देते हैं और वर्षों से पार्टी के शीर्ष नेताओं की नज़र में रहे हैं।

उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, संगठन मंत्री पवन राणा, पूर्व सांसद स्वर्गीय रामस्वरूप शर्मा, पूर्व सांसद महेश्वर सिंह, पूर्व संगठन मंत्री शिशु भाई धर्मा, भाजपा के पूर्व अध्यक्ष रणवीर सिंह, वर्तमान अध्यक्ष निहाल चंद शर्मा और विधायक अनिल शर्मा जैसे कद्दावर नेताओं के साथ बेहद करीब से काम किया है। इस बार भाजपा नेतृत्व और विशेषकर जयराम ठाकुर ने उनके नाम को आगे बढ़ा कर सबको चौंका दिया था और आज यह सादा चेहरा चाय की केतली उठाने से लेकर बड़े-बड़े अफसरों के साथ सोफे पर बैठने तक की श्रेणी में आकर अपनी अद्भुत काबिलियत और सादगी का लोहा मनवा चुका है।

अपनी इस ऐतिहासिक जीत पर अत्यंत भावुक होते हुए नवनिर्वाचित जिला परिषद सदस्य परस राम ने कहा कि यह जीत मेरी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि उस केतली की जीत है जिससे मैंने सालों तक अपने लोगों की सेवा की है, मैं कल भी एक साधारण कार्यकर्ता था और आज भी जनता का सेवक हूं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

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