पंचायत चुनाव असंवैधानिक तरीके से लटका रही सुक्खू सरकार : डॉ. सिकंदर कुमार
शिमला, 04 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर सियासत तेज हो गई है। राज्यसभा सांसद और प्रदेश भाजपा महासचिव डॉ. सिकंदर कुमार ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर पंचायत चुनावों को जानबूझकर लटकाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन सरकार अब तक नए चुनावों की अधिसूचना जारी नहीं कर रही है।
डॉ. सिकंदर कुमार ने शनिवार को आरोप लगाया कि सरकार चुनाव कराने के बजाय “प्रशासक राज” के जरिए पंचायतों को नियंत्रित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह पंचायती राज व्यवस्था की भावना के खिलाफ है और इससे लोकतंत्र की सबसे निचली इकाई प्रभावित हो रही है। उनके अनुसार, सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते असंतोष और अपनी घटती लोकप्रियता के कारण चुनाव कराने से बच रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण रोस्टर में सरकार अपनी सुविधा के अनुसार बदलाव कर रही है, जिससे कुछ वर्गों और संभावित उम्मीदवारों को चुनाव प्रक्रिया से बाहर किया जा सके। उन्होंने इसे प्रशासनिक स्तर पर अनुचित कदम बताया।
डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि सरकार ने चुनाव से पहले किए गए कई वादे पूरे नहीं किए हैं। उन्होंने महिलाओं को 1500 रुपये देने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के मुद्दों का भी जिक्र किया और कहा कि इन वादों पर प्रगति नहीं दिख रही है। उनका आरोप है कि सरकार अपनी कमियों को छिपाने के लिए पंचायत चुनावों को टाल रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि रोस्टर से जुड़े फैसलों के जरिए दलितों और पिछड़े वर्गों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उनके अनुसार, सरकार पुराने आंकड़ों के आधार पर फैसले ले रही है, जिससे कुछ क्षेत्रों में असंतुलन की स्थिति बन सकती है।
डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच उठाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास के मोर्चे पर उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पाई है और अब पंचायत स्तर पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

