मेयर कार्यकाल पर उच्च न्यायालय का नोटिस कांग्रेस सरकार के लिए बड़ा झटका: संदीपनी भारद्वाज

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मेयर कार्यकाल पर उच्च न्यायालय का नोटिस कांग्रेस सरकार के लिए बड़ा झटका: संदीपनी भारद्वाज


शिमला, 08 जनवरी (हि.स.)। नगर निगम शिमला के महापौर का कार्यकाल ढाई वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किए जाने के मामले में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा शहरी विकास विभाग को नोटिस जारी किए जाने पर भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने गुरूवार को कहा है कि उच्च न्यायालय का यह नोटिस कांग्रेस सरकार के लिए बड़ा झटका है और इससे सरकार की कानूनी व संवैधानिक चूक उजागर हुई है।

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा राज्य सरकार को अंतिम अवसर दिया जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार अब तक अदालत को संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई है। उनके अनुसार यह साबित करता है कि महापौर का कार्यकाल बढ़ाने का फैसला जल्दबाजी और राजनीतिक स्वार्थ में लिया गया, जो न तो कानून के अनुरूप है और न ही लोकतांत्रिक मर्यादाओं के।

भाजपा प्रवक्ता ने बताया कि याचिका में यह तथ्य सामने आया है कि कांग्रेस सरकार द्वारा लाया गया अध्यादेश हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम की धारा 36 के खिलाफ है। इसके बावजूद सरकार ने इसे लागू किया और बाद में राज्यपाल के पास भेजा, जहां से इसे स्वीकृति नहीं मिली। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया सरकार की प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है।

महिला आरक्षण के मुद्दे पर संदीपनी भारद्वाज ने आरोप लगाया कि रोस्टर व्यवस्था के अनुसार शिमला नगर निगम के महापौर का पद महिला के लिए आरक्षित था, लेकिन कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से इस व्यवस्था को दरकिनार कर दिया। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण की बात करने वाली सरकार ने एक महिला को महापौर बनने का अवसर जानबूझकर छीना है।

उन्होंने कहा कि अब जबकि मामला अदालत में गंभीर मोड़ ले चुका है और सरकार को नोटिस जारी हो चुके हैं, शिमला नगर निगम के वर्तमान महापौर को नैतिकता के आधार पर अपने पद से त्यागपत्र देना चाहिए। भाजपा प्रवक्ता के अनुसार, इससे लोकतंत्र और महिला आरक्षण की गरिमा बनी रहेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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