शिक्षकों की कमी से जूझ रहे कॉलेज, कांग्रेस सरकार पर भाजपा का निशाना

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शिक्षकों की कमी से जूझ रहे कॉलेज, कांग्रेस सरकार पर भाजपा का निशाना


शिक्षकों की कमी से जूझ रहे कॉलेज, कांग्रेस सरकार पर भाजपा का निशाना


शिमला, 18 जनवरी (हि.स.)। विपक्षी दल भाजपा ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार की शिक्षा नीति पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि राज्य में उच्च शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह चरमरा चुकी है और सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए अब कम छात्र संख्या का बहाना बनाकर कॉलेज बंद करने की तैयारी कर रही है।

प्रदेश भाजपा प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने रविवार को शिमला में कहा कि सरकार यह दावा कर रही है कि जिन महाविद्यालयों में 100 से कम छात्र हैं, उन्हें बंद किया जाएगा, जबकि हकीकत यह है कि कॉलेजों में दाखिले कम होने की सबसे बड़ी वजह शिक्षकों के हजारों खाली पद और पढ़ाई की बदहाल स्थिति है, न कि छात्रों की रुचि की कमी।

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि अटैचमेंट में दिए गए आधिकारिक आंकड़े ही कांग्रेस सरकार की पोल खोलने के लिए काफी हैं। कुल 2781 सृजित पदों में से 587 पद आज भी खाली पड़े हैं, यानी लगभग हर पांचवां पद रिक्त है। कई विषयों में स्थिति बेहद चिंताजनक है। संगीत वादन में 62 के 62 पद खाली हैं, शारीरिक शिक्षा में 73 में से 31 पद भरे नहीं गए हैं और कॉमर्स में 288 में से 21 पद रिक्त हैं। पेंटिंग, अप्लाइड आर्ट, फिजिकल साइंस, सोशल साइंस और पर्यावरण विज्ञान जैसे विषयों में भी बड़ी संख्या में शिक्षक नहीं हैं। कंप्यूटर एप्लीकेशन जैसे आधुनिक विषयों में भी सृजित पदों और वास्तविक जरूरत के बीच भारी असंतुलन देखने को मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि विषयवार स्थिति और भी गंभीर है। अंग्रेजी के 272 पदों में से 50, हिंदी के 198 में से 52, फिजिक्स के 170 में से 30, केमिस्ट्री के 194 में से 45, बॉटनी के 135 में से 44 और जूलॉजी के 137 में से 47 पद खाली पड़े हैं। इतिहास, राजनीतिक शास्त्र, समाजशास्त्र, लोक प्रशासन और दर्शनशास्त्र जैसे विषयों में भी दर्जनों पद रिक्त हैं। ऐसे हालात में यह उम्मीद करना गलत है कि छात्र इन कॉलेजों में दाखिला लेंगे और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी।

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की नीयत साफ नहीं है। पहले जानबूझकर शिक्षकों के पद खाली रखे जाते हैं और फिर दाखिले कम होने का हवाला देकर कॉलेज बंद करने की बात की जाती है।

संदीपनी भारद्वाज ने शिक्षा मंत्री से सवाल किया कि जब कॉलेजों में शिक्षक ही नहीं होंगे तो छात्र दाखिला कैसे लेंगे, 587 से अधिक खाली पदों को भरने के लिए सरकार ने अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं और क्या कॉलेज बंद करना प्रशासनिक विफलता से बचने का आसान रास्ता नहीं है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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