आपदा प्रभावित क्षेत्रों की अनदेखी कर रही हिमाचल सरकार : भाजपा

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आपदा प्रभावित क्षेत्रों की अनदेखी कर रही हिमाचल सरकार : भाजपा


शिमला, 27 जुलाई (हि.स.)। विपक्षी दल भाजपा ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर आपदा प्रभावित क्षेत्रों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने सोमवार को एक बयान में कहा कि प्राकृतिक आपदा के दौरान मुख्यमंत्री और सरकार के मंत्री राहत एवं पुनर्वास कार्यों पर ध्यान देने के बजाय केवल औपचारिक दौरों, फोटो खिंचवाने और राजनीतिक कार्यक्रमों में व्यस्त रहे। उनका कहना है कि नगरोटा में आयोजित बाल दिवस कार्यक्रम के दौरान भी मुख्यमंत्री और मंत्री पूरे समय कार्यक्रमों और दौरों में लगे रहे, जबकि आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लोग अब भी राहत का इंतजार कर रहे हैं।

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि बोह क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों को सरकार की ओर से केवल आश्वासन मिले हैं। जिन लोगों के घर, खेत और आजीविका प्रभावित हुई है, उन्हें अब तक पर्याप्त राहत और आर्थिक सहायता नहीं मिल सकी है। उन्होंने कहा कि सरकार को सबसे पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और सहायता पर ध्यान देना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के दौरे से पहले बोह में वाटरप्रूफ टेंट लगाए गए। इसके साथ ही शाहपुर और रैत के विश्राम गृहों में रातों-रात नए परदे और सोफे लगाए गए, पठानकोट से फर्नीचर मंगवाया गया और रंग-रोगन भी कराया गया। उन्होंने कहा कि सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल वीआईपी स्वागत की तैयारियों पर किया गया। उनका दावा है कि यदि यही पैसा आपदा प्रभावित परिवारों की मदद पर खर्च किया जाता तो कई परिवारों को राहत मिल सकती थी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार के अन्य मंत्री भी विभिन्न क्षेत्रों में केवल औपचारिक निरीक्षण करते रहे। उनके अनुसार, राहत कार्यों की वास्तविक समीक्षा नहीं हुई और प्रभावित लोगों तक ठोस सहायता नहीं पहुंचाई गई। भाजपा का कहना है कि सरकार का पूरा तंत्र राहत कार्यों से अधिक प्रचार और मीडिया प्रबंधन पर केंद्रित रहा।

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि बाल मेले के बहाने कांगड़ा में कांग्रेस के कुछ मंत्रियों ने रात के समय राजनीतिक बैठक और पार्टी का आयोजन किया, जबकि मुख्यमंत्री धर्मशाला सर्किट हाउस में अलग रहे। उन्होंने इसे कांग्रेस के भीतर बढ़ती गुटबाजी और नेतृत्व संकट का संकेत बताया। उनका आरोप है कि सरकार के मंत्री जनता की समस्याओं के समाधान की जगह राजनीतिक गतिविधियों में अधिक व्यस्त हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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