ईवीएम से जीतकर मुख्यमंत्री बने सुक्खू, अब उसी पर उठा रहे सवाल : हिमंत बिस्वा सरमा

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ईवीएम से जीतकर मुख्यमंत्री बने सुक्खू, अब उसी पर उठा रहे सवाल : हिमंत बिस्वा सरमा


शिमला, 01 नवंबर (हि.स.)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए कहा कि वह जिस ईवीएम के जरिए चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बने हैं, अब उसी मतदान प्रणाली के विरोध में दिल्ली पहुंच रहे हैं। कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि उसकी जीत के समय ईवीएम सही होती है और भाजपा की जीत के समय उसी पर सवाल क्यों उठाए जाते हैं। सरमा रविवार को शिमला में भारतीय जनता पार्टी की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा के बाद चौड़ा मैदान में आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी पर भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

सरमा ने कहा कि कांग्रेस कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में चुनाव जीतती है तो ईवीएम पर सवाल नहीं उठाती, लेकिन भाजपा की जीत के बाद निर्वाचन आयोग और मतदान प्रणाली को निशाना बनाने लगती है। उन्होंने राहुल गांधी से अपनी रायबरेली लोकसभा सीट से जीत के संदर्भ में भी ईवीएम पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। सरमा ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का समर्थन करते हुए कहा कि मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम बने रहने चाहिए और अपात्र नामों की पहचान भी जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैला रही है। उनके अनुसार सत्ता परिवर्तन का रास्ता जनता का वोट है, राजनीतिक दबाव और अराजकता नहीं।

असम के मुख्यमंत्री ने हिमाचल और असम में रोजगार तथा महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के मुद्दे पर भी तुलना की। उन्होंने कहा कि असम में भाजपा सरकार ने एक लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया था और उनके अनुसार अब तक 1.07 लाख युवाओं को नौकरियां दी गई हैं। इसके विपरीत हिमाचल में कांग्रेस ने पांच लाख रोजगार देने की गारंटी दी थी। उन्होंने सुक्खू सरकार से पूछा कि अब तक कितने युवाओं को रोजगार मिला है। सरमा ने दावा किया कि असम में करीब सात लाख महिलाओं को हर महीने 1,250 रुपये की सहायता दी जा रही है। उन्होंने हिमाचल की महिलाओं से पूछा कि क्या उन्हें कांग्रेस की घोषणा के अनुसार 1,500 रुपये मासिक सहायता मिल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने महिलाओं और युवाओं से किए वादे पूरे नहीं किए।

सरमा ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा उठाते हुए राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा हुई थी और कांग्रेस नेतृत्व को इस इतिहास पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने मतपत्रों से हुए चुनावों में भी कांग्रेस की हार का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी को अपनी चुनावी पराजय के कारणों की समीक्षा करनी चाहिए। सरमा ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और सरदार वल्लभभाई पटेल के सम्मान में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास पर भी सवाल उठाए।

सरमा ने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में हिमाचल प्रदेश में भाजपा प्रचंड बहुमत से सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि शिमला में जुटी भीड़ प्रदेश में बदलाव का संकेत है। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से घर-घर जाकर कांग्रेस सरकार से चुनावी गारंटियों का हिसाब मांगने का आह्वान किया। पदयात्रा पुराने लोकल बस स्टैंड स्थित गुरुद्वारा साहिब पार्किंग से शुरू हुई और विक्ट्री टनल तथा विधानसभा मार्ग से होते हुए चौड़ा मैदान पहुंची। यहां जनसभा हुई। इसमें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद अनुराग सिंह ठाकुर, सांसद सुरेश कश्यप, राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार और प्रदेश संगठन महामंत्री सिद्धार्थन सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

Livevns.news Desk
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