सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सुक्खू सरकार का असंवैधानिक कानून बेनकाब हुआ : जय राम ठाकुर
शिमला, 29 जुलाई (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने कहा है कि उच्चतम न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की भर्तियों की सेवा शर्तें विधेयक-2024 को असंवैधानिक ठहराते हुए राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) खारिज कर दी है। उन्होंने कहा कि इससे पहले हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय भी इस कानून को निरस्त कर चुका था।
बुधवार को जारी बयान में जय राम ठाकुर ने कहा कि यह मामला देवेंद्र कुमार बनाम हिमाचल प्रदेश एवं अन्य में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ के समक्ष आया, जहां राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी गई।
उन्होंने कहा कि इससे पहले हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एम.एस. रामचंद्र राव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कर्मचारियों को नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता का लाभ देने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद राज्य सरकार ने धर्मशाला में आयोजित शीतकालीन विधानसभा सत्र-2024 में नया विधेयक लाकर उसे पारित कराया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने उस समय इस विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए इसे असंवैधानिक बताया था और चेतावनी दी थी कि यह न्यायिक कसौटी पर टिक नहीं पाएगा।
जय राम ठाकुर ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार कर्मचारियों के हितैषी होने का दावा करती है, लेकिन उसके निर्णय कर्मचारियों के हितों के विपरीत रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य अपनी वित्तीय देनदारियों को टालना था, जिसे न्यायपालिका ने स्वीकार नहीं किया।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस फैसले का स्वागत करती है।
नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू अपनी हर राजनीतिक और प्रशासनिक विफलता के लिए भारतीय जनता पार्टी को जिम्मेदार ठहराते हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तर भारत के सबसे संपन्न मुख्यमंत्रियों से संबंधित एक रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री द्वारा दी गई सफाई भी इसी प्रवृत्ति को दर्शाती है। ठाकुर ने कहा कि संबंधित रिपोर्ट किसी स्वतंत्र संस्था द्वारा मुख्यमंत्री के चुनावी शपथ-पत्र में दर्ज संपत्ति के विवरण के आधार पर तैयार की गई थी और उसका भाजपा से कोई संबंध नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 पारित होने का स्वागत करते हुए इसे युवाओं के हित में ऐतिहासिक निर्णय बताया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला

