सुकेती खड्ड में बीबीएमबी द्वारा छोड़ी जा रही सिल्ट से हो रहे नुक्सान का समाधान करने की उठाई मांग

WhatsApp Channel Join Now
सुकेती खड्ड में बीबीएमबी द्वारा छोड़ी जा रही सिल्ट से हो रहे नुक्सान का समाधान करने की उठाई मांग


मंडी, 30 अक्टूबर (हि.स.)। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड यानी बीबीएमबी की ब्यास सतलुज लिंक परियोजना की सुंदरनगर स्थित रेजर वायर व परियोजना की बग्गी नहर से हर साल बरसात के महीनों में सुकेती खड्ड में फेंकी जानी वाली गाद से हो रहे नुक्सान को लेकर अब फिर से बल्ह के किसान लामबंद होने लगे हैं। जिला परिषद सदस्य डिंपल सैनी की अगुवाई में इस सिल्ट के नुक्सान का समाधान करने की मांग उठाई गई है।

शुक्रवार को जिला परिषद सदस्य डिंपल सैनी, चंडयाल, भड़याल, बैहना आदि गांवों के किसानों व जनप्रतिनिधियों ने बताया कि सुकेती खड्ड में बह कर आने वाली इस गाद जो पानी के कम होते ही खड्ड व किनारों में जमा हो जाती है, उपजाऊ जमीन में भी बरसात के पानी के साथ आकर फैल जाती है,। जिससे किसानों की फसल बर्बाद हो जाती है, यह सिल्ट पेयजल व सिंचाई की योजनाओं को तबाह कर देती है। वहीं शमशान घाटों पर भी कहर बरपाती है, छोटे मोटी पुलियों को भी खतरा पैदा कर देती है को लेकर मौका भ्रमण किया गया। और किसानों ने जिसका समाधान तलाशने की मांग उठाई।

गौरतलब है कि सुंदरनगर से मंडी तक सुंदरनगर, नाचन, बल्ह घाटी व मंडी सदर के इलाकों से होकर लगभग 25 किलोमीटर तक बहते हुए मंडी में यह ब्यास नदी से मिलती है।

डिंपल सैनी व अन्य जनप्रतिनिधियों ने बताया कि बग्गी नहर एवं सुंदरनगर क्षेत्र से बीबीएमबी द्वारा छोड़ी जा रही भारी मात्रा में सिल्ट गाद के कारण क्षेत्र के किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सिल्ट एक स्थान पर इकट्ठी होने के बावजूद दूसरी तरफ किसानों के खेतों का लगातार कटाव हो रहा है। इससे किसानों की उपजाऊ जमीन को नुक्सान पहुंच रहा है। इतना ही नहीं, इस समस्या के कारण क्षेत्र के कई श्मशान घाट भी बह चुके हैं, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। यह मामला किसानों की आजीविका, जमीन और स्थानीय लोगों की धार्मिक एवं सामाजिक सुविधाओं से जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद इस समस्या का स्थाई समाधान नहीं हो पाया है। इन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सिल्ट छोड़ने की प्रक्रिया और उसके प्रभावों की तुरंत जांच करवाई जाए। किसानों के खेतों का हो रहे कटाव को रोकने के लिए उचित सुरक्षा व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही प्रभावित किसानों को हुए नुक्सान का आकलन करवाकर उचित मुआवजा दिया जाए।

हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

Livevns.news Desk
Livevns.news Desk

769616 Articles

Share this story