बीबीएमबी मामले में सभी सरकारों ने की हिमाचल के अधिकारों की पैरवी, मुख्यमंत्री न लें श्रेय : भाजपा

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बीबीएमबी मामले में सभी सरकारों ने की हिमाचल के अधिकारों की पैरवी, मुख्यमंत्री न लें श्रेय : भाजपा


शिमला, 06 नवंबर (हि.स.)। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गई है। भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं विधायक रणधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर इस मामले में एकतरफा श्रेय लेने की राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला प्रदेश के हित में है और इससे हिमाचल को बिजली में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी सहित अन्य आर्थिक लाभ मिलने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि फैसले की विस्तृत प्रति मिलने के बाद ही इसके सभी पहलुओं की पूरी जानकारी सामने आएगी।

रणधीर शर्मा ने शुक्रवार को शिमला में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बीबीएमबी से जुड़ा यह मामला वर्ष 1996 से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन था। इस दौरान प्रदेश में अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारें रहीं और सभी ने अपने-अपने कार्यकाल में हिमाचल के अधिकारों की पैरवी की। ऐसे में इस उपलब्धि का श्रेय किसी एक सरकार को देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए पहले की सरकारों ने भी प्रयास किए हैं और इस मामले में भी सभी सरकारों का योगदान रहा है।

भाजपा विधायक ने वर्ष 1990 का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शांता कुमार के प्रयासों से हिमाचल को जलविद्युत परियोजनाओं में 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली का अधिकार मिला था। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए काम करती रही है। बीबीएमबी मामले में आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी हिमाचल के अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस फैसले से प्रदेश को उसके वैधानिक अधिकारों का आर्थिक लाभ मिल सकेगा।

रणधीर शर्मा ने पीटरहॉफ अतिथिगृह को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत निजी क्षेत्र को सौंपने के प्रस्ताव पर भी कांग्रेस सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रदेश की महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने पीटरहॉफ की बुकिंग बंद करने के निर्णय पर सवाल उठाते हुए सरकार से इसका कारण स्पष्ट करने को कहा। साथ ही, अन्य सरकारी होटलों को भी निजी क्षेत्र के हवाले किए जाने की आशंकाओं पर स्थिति साफ करने की मांग की।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

Livevns.news Desk
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