आज़ाद हिंद दिवस पर डॉ. अतुल ने याद दिलाया जय हिंद और कौमी तराना

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आज़ाद हिंद दिवस पर डॉ. अतुल ने याद दिलाया जय हिंद और कौमी तराना


मंडी, 20 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल स्वतंत्रता सेनानी परिषद के महासचिव डॉ. अतुल ठाकुर और अध्यक्ष जगदीश गुलेरिया ने कहा कि 21 अक्टूबर को पूरा देश आज़ाद हिंद सरकार के 84वें स्थापना दिवस के गौरवशाली इतिहास को याद कर रहा है। इस ऐतिहासिक दिन पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस, इंडियन इंडिपेंडेंस लीग और आज़ाद हिंद फ़ौज आई.एन.ए के अमर जांबाजों को नमन करते हुए सैनिक परिवारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है।

डॉ. अतुल ठाकुर ने बताया कि 21 अक्टूबर 1943 को नेताजी ने सिंगापुर में स्वतंत्र भारत की पहली अस्थाई वैकल्पिक सरकार का गठन किया था। इस सरकार का अपना बैंक, मुद्रा और प्रशासनिक ढांचा था। जो आज़ादी के बाद स्थाई सरकार बनने तक देश की बागडोर संभालने के लिए पूरी तरह तैयार था। लेकिन यह देश का दुर्भाग्य रहा कि आज़ादी के बाद अंग्रेजों की सहायक रही कांग्रेस सरकार ने इस सुनहरे इतिहास को हमारी किताबों से पूरी तरह गायब कर दिया। आज़ादी की उस दो वर्षों की लड़ाई में आई.एन.ए के लगभग 60,000 सैनिकों ने भाग लिया था, जिनमें से 26,000 वीरों ने सर्वोच्च बलिदान दिया और बाकियों को कैदी बना लिया गया। यह संख्या 1947 से लेकर आज तक स्वतंत्र भारतीय सेना द्वारा देश की रक्षा में दी गई कुल 79 वर्षों की शहादतों के लगभग बराबर है।

आज़ाद हिंद फ़ौज की इस ऐतिहासिक क्रांति में अकेले हिमाचल प्रदेश के 3,000 से अधिक वीर सैनिकों ने अग्रिम मोर्चे पर सक्रिय भूमिका निभाई थी। आज जो कदमताल गीत क़दम-क़दम बढ़ाए जा हमारी सेना की धड़कन है और जो हमारा कौमी तराना बना, उसकी अमर धुन हमारी देवभूमि के ही एक महान सपूत, कैप्टन राम सिंह ठाकुर धर्मशाला ने नेताजी के निर्देश पर तैयार की थी।

डॉ. ठाकुर ने कहा कि आज़ादी के बाद जहां कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं और अन्य क्रांतिकारियों को तो स्वतंत्रता सेनानी घोषित कर तमाम मान-सम्मान दिए गए। वहीं आई.एन.ए सिपाहियों को कई दशकों तक स्वतंत्रता सेनानी के बजाय अंग्रेजी हुकूमत का गद्दार मान कर अपने हाल पर छोड़ दिया गया। उन्हें न तो आज़ाद भारत की मुख्य फौज में शामिल किया गया और न ही ब्रिटिश सैनिकों की तर्ज पर पेंशन दी गई। उन्होंने कहा कि हमने कभी क्या उन वीरों के खून का कर्ज़ चुकाया, क्या हम जय हिंद का असली मतलब भी जानते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

Livevns.news Desk
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