शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को सुदृढ़ कर शरीर की समग्र ऊर्जा और जीवंतता को बढ़ाता है अश्वगंधा
मंडी, 21 फ़रवरी (हि.स.)। वल्लभ राजकीय महाविद्यालय मंडी के वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित अश्वगंधा जागरूकता अभियान के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि मेले में एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य अश्वगंधा के वैज्ञानिक महत्व, सतत् खेती तथा दैनिक जीवन में इसके उपयोग के प्रति जन-जागरूकता फैलाना है। प्रदर्शनी में निःशुल्क अश्वगंधा पौधों एवं जानकारी पुस्तिकाओं का वितरण किया जा रहा है। मात्र तीन दिनों में 500 से अधिक आगंतुकों को 2000 से अधिक अश्वगंधा पौधे वितरित किए जा चुके हैं, जो इस अभियान के प्रति जन-उत्साह को दर्शाता है।
अश्वगंधा एक अत्यंत महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है, जो अपने शक्तिशाली एडाप्टोजेनिक गुणों के कारण शरीर को तनाव और चिंता से निपटने में सहायता करता है तथा शारीरिक और मानसिक संतुलन स्थापित करता है। यह प्रतिरक्षा तंत्र को सुदृढ़ कर शरीर की समग्र ऊर्जा और जीवंतता को बढ़ाता है। परंपरागत रूप से इसे थकान और कमजोरी दूर करने, सहनशक्ति बढ़ाने तथा ऊर्जा प्रदान करने के लिए उपयोग किया जाता रहा है। अश्वगंधा स्मरण शक्ति, एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता को भी बेहतर बनाता है।
इसके अतिरिक्त यह हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में सहायक है, जिससे पुरुषों और महिलाओं दोनों के स्वास्थ्य को लाभ मिलता है। इसके सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर में सूजन कम करने और कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रदर्शनी की विशेष आकर्षण मिलेट-अश्वगंधा सिड्डूू एवं अश्वगंधा लड्डू जैसे मूल्य वर्धित व्यंजन रहे, जिन्हें स्वयं सहायता समूह की सदस्यों एवं स्थानीय विक्रेताओं—अनीता वैद्य एवं विद्या ठाकुर—द्वारा तैयार कर प्रदर्शित एवं विक्रय किया जा रहा है। यह पहल न केवल फूड ऐज़ मेडिसिन की अवधारणा को बढ़ावा देती है, बल्कि स्थानीय महिलाओं की आजीविका सुदृढ़ करने में भी सहायक सिद्ध हो रही है।
प्रधान अन्वेषक एवं विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान विभाग डॉ. तारा देवी सेन ने बताया कि वल्लभ राजकीय महाविद्यालय, मंडीप्रदर्शनी का एक अन्य प्रमुख आकर्षण बॉटनी विभाग के विद्यार्थियों द्वारा स्किल कोर्स नर्सरी एवं गार्डनिंग के अंतर्गत तैयार किए गए पाइन-नीडल प्लांटर रहे, जिन्हें लोगों ने विशेष सराहना के साथ खरीदा। यह पहल पर्यावरण संरक्षण एवं कौशल-आधारित शिक्षा का उत्कृष्ट उदाहरण है। कालेज छात्र विशाल, पल्लवी, अवंतिका एवं कानन अश्वगंधा की खेती की विधि, उपयोग एवं लाभों का प्रदर्शन कर रहे हैं और आगंतुकों को व्यावहारिक जानकारी प्रदान कर रहे हैं।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में ऐसे नवाचारपूर्ण और सामुदायिक उन्मुख कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं, जो विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ते हुए समाज में स्वास्थ्य, सतत् विकास और आत्मनिर्भरता का संदेश प्रसारित करें। यह प्रदर्शनी शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण का एक समन्वित प्रयास है, जो समाज में औषधीय पौधों के प्रति जागरूकता और उनके सतत् उपयोग की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम सिद्ध हो रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

