न्यूज़ीलैंड ट्रेड डील में हिमाचल के बागवानों के हितों से न हो समझौता : विक्रमादित्य सिंह

WhatsApp Channel Join Now

शिमला, 08 जुलाई (हि.स.)। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूज़ीलैंड दौरे के दौरान संभावित भारत-न्यूज़ीलैंड व्यापार समझौते को लेकर प्रदेश के बागवानों और किसानों के हितों की रक्षा की मांग उठाई है।

उन्होंने कहा कि भारत को दूसरे देशों के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने चाहिए, लेकिन ऐसे किसी भी समझौते में हिमाचल के सेब उत्पादकों और किसानों के हित प्रभावित नहीं होने चाहिए। उनका कहना है कि सेब और अन्य कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क में और कमी किए जाने से प्रदेश के बागवानों को नुकसान हो सकता है।

विक्रमादित्य सिंह ने बुधवार को शिमला में कहा कि अमेरिका के साथ हुए व्यापारिक समझौते में सेब पर आयात शुल्क कम किए जाने के बाद अब न्यूज़ीलैंड के साथ संभावित समझौते को लेकर भी बागवानों में चिंता है।

उन्होंने कहा कि यूरोपीय देशों, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका और दूसरे देशों के साथ व्यापार बढ़ाना देश के लिए जरूरी है, लेकिन इस प्रक्रिया में हिमाचल के किसानों और बागवानों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि सेब, स्टोन फ्रूट, डेयरी उत्पाद और दूसरे कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क लगातार कम होता है तो विदेशी उत्पाद कम कीमत पर भारतीय बाजार में पहुंचेंगे। इसका सीधा असर हिमाचल के बागवानों और किसानों की आय पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि इस विषय पर गंभीरता से विचार किए जाने की जरूरत है। जब भी प्रदेश के किसानों और बागवानों के हितों पर असर पड़ेगा, कांग्रेस सरकार उनकी आवाज उठाएगी और उनके हितों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।

इस दौरान विक्रमादित्य सिंह ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल के हालिया बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की आस्था पर सवाल उठाने या किसी को हिंदू होने का प्रमाण पत्र देने का अधिकार किसी के पास नहीं है।

उन्होंने कहा कि मंदिर जाना और पूजा करना हर व्यक्ति का निजी विषय है और इसके लिए किसी प्रमाण की जरूरत नहीं होती।

विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से डॉ. राजीव बिंदल का सम्मान करते हैं, फिर भी इस तरह के बयान प्रदेश के लोगों की भावनाओं को आहत करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक दल या नेता को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कौन कितना धार्मिक है।

राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर उन्होंने कहा कि वह स्वयं मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग कर चुके हैं और प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में भी शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि यदि राम मंदिर से जुड़े चंदे या भूमि खरीद-फरोख्त को लेकर लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई है तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने एक बार फिर मांग दोहराई कि इन आरोपों की जांच सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए, जिससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

Share this story