शिमला की भट्टाकुफर मंडी में गाला सेब की दस्तक

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शिमला की भट्टाकुफर मंडी में गाला सेब की दस्तक


शिमला, 04 जुलाई (हि.स.)। राजधानी शिमला की प्रमुख फल मंडी भट्टाकुफर में सेब सीजन ने अब रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। सीजन के शुरुआती दौर में डार्क बेरन गाला किस्म के सेब ने दस्तक दी है और इसके अच्छे दाम मिलने से बागवानों में उत्साह है। मंडी में गुणवत्ता के अनुसार इस किस्म का फुल बॉक्स 2500 से 3000 रुपये तक बिक रहा है। अभी इसकी आवक सीमित है, लेकिन शुरुआती कीमतों ने आने वाले सीजन को लेकर उम्मीदें बढ़ा दी हैं।

फल मंडी भट्टाकुफर आढ़ती एसोसिएशन के सचिव बिट्टू कुमार ने बताया कि इस समय मंडी में डार्क बेरन गाला की गुणवत्ता अच्छी है, इसलिए खरीदार भी बेहतर कीमत दे रहे हैं। उनका कहना है कि जैसे-जैसे अगले कुछ दिनों में गाला सेब की आवक बढ़ेगी, मंडी में कारोबार भी तेज होने की संभावना है।

मंडी में टाइडमैन किस्म का सेब भी पहुंच रहा है। यह सेब गुणवत्ता और आकार के अनुसार 1500 से 3000 रुपये प्रति फुल बॉक्स तक बिक रहा है। पिछले तीन दिनों में इसके दामों में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला है। शुक्रवार को टाइडमैन 1500 से 2400 रुपये प्रति बॉक्स तक बिका। इससे एक दिन पहले गुरुवार को इसकी कीमत 2000 से 2600 रुपये प्रति बॉक्स रही थी। बुधवार को यह 1600 से 2650 रुपये प्रति बॉक्स तक बिका था। आढ़तियों का कहना है कि अच्छी गुणवत्ता वाले फलों को लगातार ऊंचे दाम मिल रहे हैं।

नाशपाती की कीमतों में भी इन दिनों काफी अंतर देखने को मिल रहा है। मोटी डंडी किस्म की नाशपाती 1500 से 3500 रुपये तक बिकी। अलग-अलग आकार और गुणवत्ता के कारण इसके दामों में बड़ा अंतर रहा। इससे पहले नाशपाती का हाफ बॉक्स 1600 से 2000 रुपये तक बिक चुका है। डार्क बेरन गाला की बाजार में आमद के बाद फिलहाल कीमत के मामले में नाशपाती पीछे दिखाई दे रही है।

भट्टाकुफर मंडी में इन दिनों रोजाना करीब 400 से 500 पेटियां सेब पहुंच रही हैं। इसके साथ 10 से 12 हजार बॉक्स स्टोन फ्रूट की भी आवक हो रही है। आढ़तियों का कहना है कि अभी फलों की आमद सीमित है, लेकिन जुलाई के दूसरे सप्ताह से इसमें तेजी आने की उम्मीद है।

इस बार मौसम के असर से सेब और दूसरे फलों के उत्पादन पर प्रभाव पड़ा है। ऐसे में कारोबारियों का मानना है कि पूरे सीजन के दौरान अच्छी गुणवत्ता वाले फलों को बेहतर दाम मिल सकते हैं।

आढ़ती एसोसिएशन ने बागवानों से आग्रह किया है कि वे पूरी तरह तैयार होने के बाद ही फल मंडी में लाएं। समय से पहले तोड़े गए फलों की गुणवत्ता कम हो जाती है, जिससे उनकी कीमत भी घट जाती है। अच्छी गुणवत्ता का फल मंडी पहुंचेगा तो बागवानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ हिमाचल के फलों की पहचान भी मजबूत बनी रहेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

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