न्यूजीलैंड से सेब आयात पर ड्यूटी घटने से हिमाचल के बागवान नाराज़, केंद्र से मसला उठाएगी सरकार
शिमला, 13 जनवरी (हि.स.)। भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) के तहत न्यूजीलैंड से आने वाले सेब पर आयात शुल्क घटाए जाने के फैसले को लेकर हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों में गहरी नाराज़गी है। बागवानों का कहना है कि न्यूजीलैंड से सस्ते सेब आने से हिमाचली सेब को बाजार में सीधी चुनौती मिलेगी, जिससे स्थानीय बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान होगा। उनका आरोप है कि इम्पोर्ट ड्यूटी घटने से सेब के दाम गिरेंगे और लाखों बागवानों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा। इस कदम से हिमाचली सेब को सीधे तौर पर नुकसान होगा और प्रदेश के लाखों बागवानों की आजीविका पर असर पड़ेगा।
इसी मुद्दे पर मंगलवार को शिमला में मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, बागवानी मंत्री और बागवानों के प्रतिनिधियों के बीच अहम बैठक हुई।
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बैठक में कहा कि सेब उत्पादन हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी का एक प्रमुख आधार है और इसका संरक्षण व संवर्द्धन राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यूजीलैंड से आयात किए जाने वाले सेब पर आयात शुल्क घटाने से प्रदेश के बागवानों के हितों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस विषय पर सकारात्मक समाधान निकालने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष मामला उठाएंगे और स्वयं केंद्रीय वित्त मंत्री तथा केंद्रीय वाणिज्य मंत्री से मुलाकात कर हिमाचल के बागवानों के हितों के संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह करेंगे।
बैठक के दौरान बागवानों के प्रतिनिधियों ने अपनी चिंताएं खुलकर रखीं। हिमाचल सेब उत्पादक संघ के राज्य अध्यक्ष संजय चौहान ने कहा कि आयात शुल्क घटाने से विदेशी सेब सस्ते दामों पर बाजार में आएंगे, जिससे स्थानीय सेब को नुकसान होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के इस फैसले से हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के बागवान भी प्रभावित होंगे। संजय चौहान ने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2014 में विदेशी सेब पर आयात शुल्क 100 प्रतिशत करने की बात कही गई थी, लेकिन अब इसके उलट फैसला लिया जा रहा है।
बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि राज्य सरकार बागवानों की सभी मांगों को केंद्र सरकार के सामने मजबूती से रखेगी। उन्होंने कहा कि यदि इसके बावजूद आयात शुल्क बढ़ाने या बागवानों को राहत देने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो बागवानों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ सकता है। नेगी ने दोहराया कि राज्य सरकार पूरी तरह बागवानों के साथ खड़ी है।
इस बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, सचिव सी. पालरासु, निदेशक बागवानी विनय सिंह, हिमाचल किसान सभा के राज्य सचिव राकेश सिंघा, स्टोन फ्रूट ग्रोवर एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक सिंघा, प्रोग्रेसिव ग्रोवर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष आशुतोष चौहान सहित बड़ी संख्या में प्रगतिशील बागवान मौजूद रहे। बागवानों ने साफ किया कि यदि केंद्र स्तर पर जल्द समाधान नहीं निकला, तो वे अपने हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर आगे की रणनीति तय करेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

