आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मौत पर रोष, मुआवज़े व सुरक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन
शिमला, 12 जनवरी (हि.स.)। ड्यूटी के दौरान मंडी जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हर्षा की मौत के मामले ने हिमाचल प्रदेश में आंगनवाड़ी कर्मियों की सुरक्षा और जिम्मेदारी के सवाल को फिर से सामने ला दिया है। इसी को लेकर आंगनवाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन (सीटू) के बैनर तले आईसीडीएस प्रोजेक्ट शिमला के चक्कर, न्यू शिमला और संजौली वृत्तों की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने सोमवार को शिमला में प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन में सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, जिला सचिव विवेक कश्यप और कार्यालय सचिव रामप्रकाश भी शामिल रहे। बाद में यूनियन ने बाल विकास परियोजना अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि मंडी जिले के टारना वृत्त में पल्स पोलियो अभियान के दौरान गिरने से हर्षा की मौत कोई साधारण हादसा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की नाकामी है, जिसमें आंगनवाड़ी कर्मियों से जोखिम भरे बहु-विभागीय काम तो कराए जाते हैं, लेकिन दुर्घटना या मौत होने पर सरकार और विभाग जिम्मेदारी लेने से बचते हैं।
यूनियन नेताओं हरदेई देवी, मीना देवी, ललिता देवी, प्रोमिला, संध्या और पुष्पा रोहाल ने कहा कि इससे पहले भी ड्यूटी के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मौत के मामले सामने आ चुके हैं। कुल्लू के सैंज क्षेत्र में फिसलने से और जून 2024 में चंबा जिले में सड़क हादसे में दो आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मौत हुई थी। उनका आरोप है कि इसके बावजूद आंगनवाड़ी कर्मियों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई।
यूनियन ने मांग की कि हर्षा के परिजनों को तुरंत 50 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया जाए और ड्यूटी के दौरान मृत सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मामलों में समान मुआवज़ा तय किया जाए। साथ ही जिस विभाग का काम कराया जाए, उसकी स्पष्ट कानूनी जवाबदेही तय हो। उन्होंने दुर्घटना बीमा, जोखिम भत्ता और सामाजिक सुरक्षा देने की भी मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को पिछले चार महीनों से केंद्र का वेतन हिस्सा और दिसंबर का राज्य हिस्सा नहीं मिला है। बकाया वेतन तुरंत जारी किया जाए। यूनियन ने वेतन बढ़ोतरी, नियमितीकरण, ग्रेच्युटी, पेंशन और निजीकरण के विरोध में संघर्ष तेज करने का ऐलान किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

