राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव 2026: रसीदी टिकट में जीवंत हुई अमृता प्रीतम की स्मृतियां, संघर्ष और प्रेम की अनूठी दास्तान

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राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव 2026: रसीदी टिकट में जीवंत हुई अमृता प्रीतम की स्मृतियां, संघर्ष और प्रेम की अनूठी दास्तान


राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव 2026: रसीदी टिकट में जीवंत हुई अमृता प्रीतम की स्मृतियां, संघर्ष और प्रेम की अनूठी दास्तान


मंडी, 07 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव 2026 की अंतिम संध्या साहित्य, स्मृति और रंगमंच के अद्भुत संगम की साक्षी बनी, जब हिमाचल सांस्कृतिक शोध संस्थान एवं रंगमंडल, मंडी द्वारा प्रस्तुत रसीदी टिकट का मंचन किया गया। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव का समापन अमृता प्रीतम की आत्मकथा पर आधारित इस संवेदनशील प्रस्तुति के साथ हुआ। प्रस्तुति का निर्देशन सीमा शर्मा ने किया और उन्होंने ही अमृता प्रीतम की केंद्रीय भूमिका को अपने सशक्त अभिनय से जीवंत किया। अमृता प्रीतम की आत्मकथा ‘रसीदी टिकट’ केवल एक लेखिका के जीवन का वृत्तांत नहीं, बल्कि एक ऐसी स्त्री की आत्मस्वीकृति है जिसने अपने समय की रूढ़ियों, सामाजिक बंधनों और निजी पीड़ाओं के बीच अपनी स्वतंत्र आवाज़ तलाश की।

बचपन की स्मृतियों से आरंभ होकर प्रेम, विरह, संघर्ष, साहित्य, संबंधों और आत्मनिर्णय तक की उनकी जीवन-यात्रा इस कृति में बेहद बेबाकी और आत्मीयता के साथ सामने आती है।

रसीदी टिकट के मंचन में अमृता के जीवन के अनेक पड़ावों को रंगभाषा के माध्यम से एक सूत्र में पिरोया गया। उनके भीतर पलती कवयित्री, जीवन से जूझती स्त्री, प्रेम में डूबी संवेदनशील आत्मा और अपने समय से सवाल करती लेखिका—इन सभी रूपों को मंच पर उकेरने का प्रयास किया गया।

प्रस्तुति में साहिर लुधियानवी से अमृता का वह गहरा और लगभग अनकहा संबंध भी विशेष रूप से उभरकर आया, जिसमें शब्दों से अधिक मौन बोलता है।

साहिर के प्रति अमृता का आकर्षण, उनकी कविताओं में उतरती स्मृतियाँ और एक अधूरे प्रेम की टीस ने प्रस्तुति को भावनात्मक गहराई प्रदान की। इसके बाद इमरोज़ का उनके जीवन में प्रवेश उस यात्रा का एक अलग अध्याय बनकर सामने आया—जहाँ प्रेम केवल पाने का नाम नहीं, बल्कि किसी की स्वतंत्रता और अस्तित्व को स्वीकार करने का भी नाम है।

‘रसीदी टिकट’ का संसार दरअसल अमृता के जीवन के उन छोटे-बड़े अनुभवों का दस्तावेज़ है, जिन्हें उन्होंने शब्दों में दर्ज कर अपने जीवन को साहित्य में बदल दिया। उनकी कलम ने निजी पीड़ा को सार्वभौमिक संवेदना दी और व्यक्तिगत प्रेम को एक ऐसी साहित्यिक स्मृति में बदल दिया, जिसे पीढ़ियाँ पढ़ती और महसूस करती रहेंगी।

सीमा शर्मा के एकल अभिनय अभिनय की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने अमृता को केवल मंच पर प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि उनके भीतर उतरने का प्रयास किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा

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