हिमाचल में एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, बड़े आंदोलन की चेतावनी
शिमला, 10 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की पांच दिन तक चली प्रदेशव्यापी हड़ताल और शिमला में किया गया महापड़ाव शुक्रवार को फिलहाल समाप्त हो गया है। यह हड़ताल सीटू से संबंधित 108 एवं 102 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन के बैनर तले की गई थी। यूनियन का कहना है कि श्रम कानूनों और अदालतों के आदेश लागू करने, न्यूनतम वेतन देने और कर्मचारियों की कथित प्रताड़ना बंद करने सहित कई मांगों को लेकर यह आंदोलन किया गया था। यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द मांगें पूरी नहीं हुईं तो आगे निर्णायक संघर्ष शुरू किया जाएगा।
हड़ताल के दौरान प्रदेशभर में एंबुलेंस सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रहीं। इस दौरान सैकड़ों कर्मचारी भारी बारिश और ठंड के बावजूद छोटा शिमला स्थित प्रदेश सरकार सचिवालय के बाहर डटे रहे। आंदोलन के अंतिम दिन कर्मचारियों ने सचिवालय से कुसुंपटी स्थित नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के प्रबंध निदेशक कार्यालय तक रैली निकाली और वहां करीब दो घंटे तक धरना दिया।
धरने के दौरान यूनियन प्रतिनिधियों की बैठक एनएचएम के उपनिदेशक के साथ हुई। बैठक में उपनिदेशक ने आश्वासन दिया कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर एक सप्ताह के भीतर यूनियन, एनएचएम और मेडस्वान फाउंडेशन प्रबंधन के बीच बैठक कर समाधान की कोशिश की जाएगी। साथ ही जिन कर्मचारियों का तबादला किया गया है या जिन्हें नौकरी से निकाला गया है, उन्हें बहाल करने की पहल करने और हड़ताल के दौरान कर्मचारियों के साथ कथित प्रताड़ना रोकने का भरोसा भी दिया गया।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने आरोप लगाया कि नेशनल हेल्थ मिशन के तहत मेडस्वान फाउंडेशन के अधीन काम कर रहे सैकड़ों पायलट, कैप्टन और ईएमटी कर्मचारी लंबे समय से शोषण का सामना कर रहे हैं। उनका कहना है कि कर्मचारियों से 12 घंटे ड्यूटी करवाई जाती है, लेकिन ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता और कई कर्मचारियों को सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल रहा है।
यूनियन नेताओं का कहना है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट, लेबर कोर्ट, सीजेएम कोर्ट शिमला और श्रम विभाग के आदेशों के बावजूद कई वर्षों से कर्मचारियों की मांगें पूरी नहीं की गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूनियन के माध्यम से आवाज उठाने पर कर्मचारियों को मानसिक रूप से परेशान किया जाता है, कुछ नेताओं का तबादला कर दिया जाता है और कुछ कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के लिए दबाव बनाया जाता है। कई कर्मचारियों को बिना कारण महीनों तक ड्यूटी से बाहर रखने के भी आरोप लगाए गए हैं।
यूनियन ने यह भी कहा कि कर्मचारियों के ईपीएफ और ईएसआई के क्रियान्वयन में भी गंभीर त्रुटियां हैं और वेतन से कटौती को लेकर भी शिकायतें हैं। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि पहले वे जीवीके ईएमआरआई कंपनी के अधीन काम कर रहे थे, लेकिन उस दौरान सेवा समाप्ति के बाद उन्हें छंटनी भत्ता, ग्रेच्युटी, नोटिस पे और अन्य देय लाभ नहीं मिले।
यूनियन ने सरकार और संबंधित प्रबंधन से मांग की है कि कर्मचारियों को नियमानुसार न्यूनतम वेतन दिया जाए, 12 घंटे की ड्यूटी पर डबल ओवरटाइम का भुगतान किया जाए, सभी वैधानिक छुट्टियां लागू की जाएं और अदालतों तथा श्रम विभाग के आदेशों को तुरंत लागू किया जाए। साथ ही यूनियन नेताओं के तबादले रद्द करने, कर्मचारियों की सेवा निरंतरता और वरिष्ठता सुनिश्चित करने तथा लंबित एरियर का भुगतान करने की भी मांग की गई है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा

