संत निरंकारी मिशन : धर्मशाला में स्वच्छ जल, स्वच्छ मन अभियान के अंतर्गत चला सफाई अभियान

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संत निरंकारी मिशन : धर्मशाला में स्वच्छ जल, स्वच्छ मन अभियान के अंतर्गत चला सफाई अभियान


धर्मशाला, 22 फ़रवरी (हि.स.)। धर्मशाला में संत निरंकारी मिशन द्वारा ‘प्रोजेक्ट अमृत’ के अंतर्गत ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ अभियान का चौथा चरण उत्साह, अनुशासन और सेवा-भाव के साथ संपन्न हुआ। परम श्रद्धेय सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन निर्देशानुसार यह अभियान समस्त भारत में एक साथ आयोजित किया गया, जिसमें धर्मशाला शाखा ने सक्रिय एवं प्रेरणादायक भूमिका निभाई। संत निरंकारी मिशन की स्थानीय शाखा द्वारा सिद्धपुर स्थित प्राचीन बाबड़ी एवं उससे जुड़े नाले तथा दाड़ी क्षेत्र में डिस्पेंसरी के समीप स्थित बाबड़ी और पास बहते नाले की सघन सफाई की गई। इसके साथ ही मेला ग्राउंड दाड़ी के समीप बनी बाबड़ी और आसपास के क्षेत्र की साफ-सफाई भी की गई। स्वयंसेवकों ने जल स्रोतों में जमी गाद, प्लास्टिक, कांच, कपड़े, घास एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थों को अलग-अलग श्रेणियों में एकत्रित कर पर्यावरण मानकों के अनुरूप निस्तारण सुनिश्चित किया।

इस अवसर पर विशेष रूप से युवाओं एवं महिलाओं की उल्लेखनीय सहभागिता देखने को मिली। स्वयंसेवकों ने “जल है तो कल है” तथा “स्वच्छ जल, स्वस्थ समाज” जैसे संदेशों के माध्यम से आसपास के निवासियों को जागरूक किया। कई स्थानीय नागरिकों ने इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों में सहयोग देने का संकल्प व्यक्त किया।

कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण, वर्षा जल संचयन एवं प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली पर भी संवाद किया गया। वक्ताओं ने बताया कि जल संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं, बल्कि जन-सहभागिता से ही स्थायी परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

अभियान की समाप्ति के पश्चात संत निरंकारी सत्संग भवन, दाड़ी में साध-संगत का आयोजन किया गया। इस अवसर पर धर्मशाला ब्रांच की संयोजक बहन रूपा गुरुंग ने अपने संबोधन में कहा कि सेवा तभी सार्थक होती है जब उसमें निःस्वार्थ भाव और निरंतरता हो। संगत में मिशन के चौथे गुरु बाबा हरदेव सिंह जी को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए उनके पर्यावरण-प्रेम और मानवता के संदेश को याद किया गया।

वक्ताओं ने यह भी बताया कि ‘प्रोजेक्ट अमृत’ केवल एक सफाई अभियान नहीं, बल्कि यह एक जन-आंदोलन है जो समाज को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाता है। इस पहल के माध्यम से जल स्रोतों के संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक एकता, सहयोग और सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा मिलता है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

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